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Shimla News: एचपीयू में युवा संसद शुरू, आरक्षण पर बहस
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विधानसभा अध्यक्ष पठानिया ने किया शुभारंभ
देशभर के 175 युवा छात्र करेंगे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के सभागार में वीरवार को विधि विभाग द्वारा आयोजित पहली युवा संसद शुरू हुई। इसके उद्घाटन सत्र में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
संसद में आरक्षण संशोधन विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका डिबेटर संकल्प सिंह चौहान ने निभाई, यूआईएलएस की छात्रा रितिका ने उपाध्यक्ष के रूप में सत्र का संचालन किया। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति एवं अधिष्ठाता विधि संकाय और विभागाध्यक्ष प्रो. राजिंद्र वर्मा कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता विधि संकाय डॉ. देवेंद्र सिंह मुख्य वक्ता रहे। युवा संसद में देशभर के अलग-अलग विधि संस्थानों से आए 175 युवा छात्र सांसद दो दिनों तक तय किए विषय क्रीमिलेयर और आरक्षण संशोधन विधेयक-2024 के बिल पर चर्चा करेंगे। विशिष्ट अतिथि आचार्य राजिंद्र वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय युवा संसद आयोजित करवाने का मुख्य उद्देश्य कानून के छात्रों को कानून बनने की प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है। मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग के डीन प्रो. देवेंदर सिंह ने कहा कि यह वर्तमान समय में एक ज्वलंत मुद्दा है और इस विषय पर चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से जनमानस में और अधिक स्पष्टता लाई जा सकती है। उन्होंने क्रीमिलेयर और आरक्षण विषय के 1993 से लेकर चले आ रहे विषय और इसके लेकर हुए संघर्ष तथा सर्वोच्च न्यायालय से आए फैसलों, लोक सभा में पारित हुए संशोधन विधेयक सहित इसके हर पहलू से अवगत किया। विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने कहा कि आरक्षित वर्ग को और आगे आर्थिक आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कार्यक्रम में विधिक अध्ययन संस्थान के निदेशक एवं कार्यक्रम के संयोजक प्रो. शिव कुमार डोगरा, समन्वयक डॉ. शालिनी कश्मीरिया, डीएसडब्लू प्रो. ममता मोक्टा, डीन प्लानिंग एवं शिक्षक मामले प्रो. जोगिंद्र धीमान और चीफ वार्डन प्रो. आरएल जिंटा मौजूद रहे।
जरूरतमंद लोगों के बारे में करें विचार : पठानिया
शिमला। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने युवा संसद के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आरक्षण को समझने के लिए भारत को स्वतंत्रता से पहले और बाद के परिवर्तन को समझना आवश्यक है। वह स्वयं ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखते हैं, इसलिए समाज और अपने लोगों तथा उनकी समस्याओं की समझने का मेरा लंबा अनुभव है। समाज में सभी वर्गों को आगे बढ़ने का समान अधिकार मिले इसकी शुरुआत की गई, लेकिन इसके लिए बनी नीतियों को हम जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों तक पूरी तरह से नहीं पहुंचा पाए हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग को समान अवसर प्रदान करने के लिए आरक्षण को 10 वर्षों के लिए लागू किया था लेकिन यह कार्य तय अवधि में पूरा नहीं हुआ। आरक्षित वर्ग और पिछड़े वर्ग के बहुत से लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला है।
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देशभर के 175 युवा छात्र करेंगे विभिन्न मुद्दों पर चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के सभागार में वीरवार को विधि विभाग द्वारा आयोजित पहली युवा संसद शुरू हुई। इसके उद्घाटन सत्र में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
संसद में आरक्षण संशोधन विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका डिबेटर संकल्प सिंह चौहान ने निभाई, यूआईएलएस की छात्रा रितिका ने उपाध्यक्ष के रूप में सत्र का संचालन किया। विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति एवं अधिष्ठाता विधि संकाय और विभागाध्यक्ष प्रो. राजिंद्र वर्मा कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। उद्घाटन सत्र में पंजाब विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता विधि संकाय डॉ. देवेंद्र सिंह मुख्य वक्ता रहे। युवा संसद में देशभर के अलग-अलग विधि संस्थानों से आए 175 युवा छात्र सांसद दो दिनों तक तय किए विषय क्रीमिलेयर और आरक्षण संशोधन विधेयक-2024 के बिल पर चर्चा करेंगे। विशिष्ट अतिथि आचार्य राजिंद्र वर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय युवा संसद आयोजित करवाने का मुख्य उद्देश्य कानून के छात्रों को कानून बनने की प्रक्रिया का व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करना है। मुख्य वक्ता पंजाब विश्वविद्यालय के विधि विभाग के डीन प्रो. देवेंदर सिंह ने कहा कि यह वर्तमान समय में एक ज्वलंत मुद्दा है और इस विषय पर चर्चा-परिचर्चा के माध्यम से जनमानस में और अधिक स्पष्टता लाई जा सकती है। उन्होंने क्रीमिलेयर और आरक्षण विषय के 1993 से लेकर चले आ रहे विषय और इसके लेकर हुए संघर्ष तथा सर्वोच्च न्यायालय से आए फैसलों, लोक सभा में पारित हुए संशोधन विधेयक सहित इसके हर पहलू से अवगत किया। विवि के अधिष्ठाता अध्ययन प्रो. बीके शिवराम ने कहा कि आरक्षित वर्ग को और आगे आर्थिक आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है। कार्यक्रम में विधिक अध्ययन संस्थान के निदेशक एवं कार्यक्रम के संयोजक प्रो. शिव कुमार डोगरा, समन्वयक डॉ. शालिनी कश्मीरिया, डीएसडब्लू प्रो. ममता मोक्टा, डीन प्लानिंग एवं शिक्षक मामले प्रो. जोगिंद्र धीमान और चीफ वार्डन प्रो. आरएल जिंटा मौजूद रहे।
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जरूरतमंद लोगों के बारे में करें विचार : पठानिया
शिमला। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने युवा संसद के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि आरक्षण को समझने के लिए भारत को स्वतंत्रता से पहले और बाद के परिवर्तन को समझना आवश्यक है। वह स्वयं ग्रामीण क्षेत्र से संबंध रखते हैं, इसलिए समाज और अपने लोगों तथा उनकी समस्याओं की समझने का मेरा लंबा अनुभव है। समाज में सभी वर्गों को आगे बढ़ने का समान अधिकार मिले इसकी शुरुआत की गई, लेकिन इसके लिए बनी नीतियों को हम जमीनी स्तर पर जरूरतमंद लोगों तक पूरी तरह से नहीं पहुंचा पाए हैं। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति, पिछड़े वर्ग को समान अवसर प्रदान करने के लिए आरक्षण को 10 वर्षों के लिए लागू किया था लेकिन यह कार्य तय अवधि में पूरा नहीं हुआ। आरक्षित वर्ग और पिछड़े वर्ग के बहुत से लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला है।
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