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मोदी की ‘स्वच्छ यमुना’ मुहिम को यहां दिखाया जा रहा ठेंगा

Mon, 18 May 2015 01:07 PM IST
Updated Mon, 18 May 2015 01:07 PM IST
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Ymuna under Swacch Bharat Mission.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भले ही यमुना नदी को स्वच्छ करने की मुहिम पूरे देशभर में छेड़ रखी हो, लेकिन हिमाचल में इसको तगड़ा झटका लग रहा है। गुरु की नगरी पांवटा साहिब में 42 हजार की आबादी का कूड़ा-कचरा रोजाना यमुना नदी के किनारे 200 मीटर क्षेत्र में ठिकाने लगाया जा रहा है।

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हर माह लगभग 360 और सालाना 4300 टन कचरा यहां पहुंचता है। कूड़ा संयंत्र न होने के चलते नगर परिषद इसे यमुना के तट पर जला देती है। यहां हजारों टन कचरा और गाद डंप रहती है। जैसे ही बरसात आती है पूरी गंदगी नदी में बह जाती है। यमुना को स्वच्छ करने के लिए मोदी ने करोड़ों का ‘यमुना बचाओ’ प्रोजेक्ट शुरू किया है, लेकिन पिछले पांच वर्षों से बजट होने के बावजूद नगर परिषद एक कूड़ा संयंत्र तक नहीं स्थापित करवा पाई है।
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नप का अजीब तर्क तो देखिए

Ymuna under Swacch Bharat Mission.

सवाल यह है कि हिमाचल के सिरमौर जिले में बहने वाली यमुना नदी को मोदी की मुहिम से क्यों नहीं जोड़ा जा रहा। नगर परिषद पांवटा का तर्क है कि वह कूड़े को नदी से दूर डंप करते हैं।

कूड़ा बीनने वाले पॉलीथिन उठा लेते हैं, बाकी बचे कूड़े को जला दिया जाता है। लेकिन जलने के बाद भी टनों के हिसाब से गंदगी यहां जमा रहती है। हकीकत ये है कि इस समय जहां कूड़ा डंप किया गया है उससे 30 फुट दूर तक बरसात में यमुना का जलस्तर चढ़ता है।

इन राज्यों से गुजरती है यमुना

Ymuna under Swacch Bharat Mission.

हिमालय के कालिंदी पर्वत से निकलकर यमुना उत्तराखंड के यमनोत्री से उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद और फिर हिंद महासागर तक 1376 किमी लंबा सफर तय करती है। यमुना नदी उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली, हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के सैकड़ों शहरों से गुजरते हुए इलाहाबाद में गंगा से मिलती है। हिमाचल में यमुना की सहायक नदियां टौंस, गिरी, पब्बर, बाता, मीनस इसमें समाहित होती हैं।

पांवटा शहर से प्रतिदिन 11 से 12 टन कूड़ा-कचरा उत्पन्न होता है। इसे यमुना तट से दूर एकत्र कर जलाया जाता है। क्विंटलों प्लास्टिक कबाड़ी उठा ले जाते हैं। नप को पांच वर्ष पहले 40 लाख रुपये आधुनिक कूड़ा संयंत्र स्थापित करने को मिले थे, लेकिन पंचायतों के विरोध के चलते कूड़ा संयंत्र नहीं लग पाया। यमुना की पवित्रता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

- केआर ठाकुर, कार्यकारी अधिकारी, नप पांवटा (सिरमौर)

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