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Shimla News: आईजीएमसी के डी ब्लॉक में एक्सरे मशीन खराब, मरीज झेल रहे परेशानी
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दो दिनों से खराब है एक्सरे मशीन, अस्पताल प्रबंधन नहीं दे रहा ध्यान
आपातकालीन कक्ष और बी-ब्लॉक में करवाने पड़ रहे एक्सरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के डी-ब्लॉक में एक्सरे मशीन खराब हो गई है। इस कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बार-बार खराब हो रही मशीन पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है और उन्हें मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। दो दिन से अस्पताल के डी-ब्लॉक में एक्सरे नहीं हो रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बी-ब्लॉक या आपातकालीन कक्ष में एक्सरे के लिए जाना पड़ रहा है। आपातकालीन कक्ष में भी एक्सरे करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने से परेशानी हो रही है। वहां आपातस्थिति में आने वाले मरीजों के एक्सरे भी प्रभावित हो रहे हैं। यदि किसी अन्य मरीज का एक्सरे चल रहा हो और इसी दौरान आपातस्थिति में एक्सरे की जरूरत पड़ जाए तो दिक्कत होती है। वहीं बी-ब्लॉक में एक्सरे कक्ष के बाहर भी मरीजों की कतारें लग रही हैं। भीड़ को देखते हुए कई मरीज निजी क्लीनिकों में एक्सरे करवाने को मजबूर हो रहे हैं। इसके लिए उन्हें 300 से 800 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
गौरतलब है कि अस्पताल की मेडिसिन, हड्डी रोग समेत अन्य ओपीडी के चिकित्सक मरीजों की बीमारी के अनुसार उन्हें एक्सरे करवाने के लिए भेजते हैं। एक्सरे करवाने के लिए मरीजों का अलग से फॉर्म भरा जाता है। फॉर्म मिलने के बाद मरीज डी-ब्लॉक में एक्सरे करवाने पहुंचते हैं, लेकिन मशीन खराब होने के कारण उन्हें वहां से लौटना पड़ रहा है। इसके बाद मरीज ओपीडी में जाकर जानकारी लेते हैं, जहां से उन्हें आपातकालीन कक्ष या बी-ब्लॉक में एक्सरे करवाने के लिए भेजा जा रहा है। तीमारदार सुरेश ने बताया कि वह अपनी माता को सुबह 8:30 बजे अस्पताल जांच के लिए लेकर आए थे। चिकित्सक ने उन्हें एक्सरे करवाने के लिए कहा था। इसके बाद वह पहले डी-ब्लॉक और फिर बी-ब्लॉक में एक्सरे करवाने पहुंचे, लेकिन भीड़ के कारण काफी परेशानी हुई। वहीं, सुषमा, नमिता, सुरेश, रोशन और जीत बहादुर ने बताया कि उन्हें एक्सरे करवाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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आपातकालीन कक्ष और बी-ब्लॉक में करवाने पड़ रहे एक्सरे
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के डी-ब्लॉक में एक्सरे मशीन खराब हो गई है। इस कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बार-बार खराब हो रही मशीन पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई संज्ञान नहीं लिया जा रहा है। इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है और उन्हें मजबूरी में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। दो दिन से अस्पताल के डी-ब्लॉक में एक्सरे नहीं हो रहे हैं। ऐसे में मरीजों को बी-ब्लॉक या आपातकालीन कक्ष में एक्सरे के लिए जाना पड़ रहा है। आपातकालीन कक्ष में भी एक्सरे करवाने वाले मरीजों की संख्या बढ़ने से परेशानी हो रही है। वहां आपातस्थिति में आने वाले मरीजों के एक्सरे भी प्रभावित हो रहे हैं। यदि किसी अन्य मरीज का एक्सरे चल रहा हो और इसी दौरान आपातस्थिति में एक्सरे की जरूरत पड़ जाए तो दिक्कत होती है। वहीं बी-ब्लॉक में एक्सरे कक्ष के बाहर भी मरीजों की कतारें लग रही हैं। भीड़ को देखते हुए कई मरीज निजी क्लीनिकों में एक्सरे करवाने को मजबूर हो रहे हैं। इसके लिए उन्हें 300 से 800 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
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गौरतलब है कि अस्पताल की मेडिसिन, हड्डी रोग समेत अन्य ओपीडी के चिकित्सक मरीजों की बीमारी के अनुसार उन्हें एक्सरे करवाने के लिए भेजते हैं। एक्सरे करवाने के लिए मरीजों का अलग से फॉर्म भरा जाता है। फॉर्म मिलने के बाद मरीज डी-ब्लॉक में एक्सरे करवाने पहुंचते हैं, लेकिन मशीन खराब होने के कारण उन्हें वहां से लौटना पड़ रहा है। इसके बाद मरीज ओपीडी में जाकर जानकारी लेते हैं, जहां से उन्हें आपातकालीन कक्ष या बी-ब्लॉक में एक्सरे करवाने के लिए भेजा जा रहा है। तीमारदार सुरेश ने बताया कि वह अपनी माता को सुबह 8:30 बजे अस्पताल जांच के लिए लेकर आए थे। चिकित्सक ने उन्हें एक्सरे करवाने के लिए कहा था। इसके बाद वह पहले डी-ब्लॉक और फिर बी-ब्लॉक में एक्सरे करवाने पहुंचे, लेकिन भीड़ के कारण काफी परेशानी हुई। वहीं, सुषमा, नमिता, सुरेश, रोशन और जीत बहादुर ने बताया कि उन्हें एक्सरे करवाने के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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