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अमर उजाला असर: एक कमरे में नहीं चलेंगी अब पांच-पांच कक्षाएं, सरकारी स्कूलों के बनेंगे नए भवन

Thu, 29 Oct 2026 05:45 AM IST
Krishan Singh अनिमेष कौशल, शिमला।
अनिमेष कौशल, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 29 Oct 2026 05:45 AM IST
सार

अमर उजाला के अभियान पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षा निदेशालय से ऐसे स्कूलों का प्रस्ताव मांगा है, जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, लेकिन कक्षाएं चलाने के लिए पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। 

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Students will be freed from the confinement of single room classrooms; new school buildings will be constructe
अमर उजाला में प्रकाशित खबरें। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में कमरों की कमी का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। अमर उजाला के अभियान पर संज्ञान लेते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शिक्षा निदेशालय से ऐसे स्कूलों का प्रस्ताव मांगा है, जहां विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, लेकिन कक्षाएं चलाने के लिए पर्याप्त कमरे उपलब्ध नहीं हैं। इन स्कूलों में नए भवन बनाने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। वहीं, जब तक स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक अधिक नामांकन वाले स्कूलों के आसपास किराये पर कमरे लेकर विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए अतिरिक्त जगह उपलब्ध करवाने की योजना है। शिक्षा विभाग इन स्कूलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आगामी प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में अतिरिक्त बजट की मांग भी रखेगा।

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शिक्षा मंत्री ने विभाग को आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की संख्या के अनुरूप कक्षाएं चलाने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध करवाना है, ताकि एक ही कमरे में कई कक्षाओं को संचालित करने की मजबूरी से राहत मिल सके। शिक्षा मंत्री ने विभाग को इस दिशा में आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भवनों और कक्षाओं की उपलब्धता का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यू-डाइस के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 470 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें केवल एक-एक कमरा है। इनमें 282 प्राथमिक, 181 मिडिल, पांच हाई और दो वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल शामिल हैं।

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प्राथमिक और मिडिल स्तर पर स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण
प्राथमिक और मिडिल स्तर पर स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है। प्रदेश के 9,720 प्राथमिक स्कूलों में 1,913 के पास केवल दो कमरे हैं, जबकि 3,733 स्कूलों में तीन कमरे दर्ज हैं। इसी तरह 1,735 मिडिल स्कूलों में 209 के पास दो और 1,014 के पास तीन कमरे हैं। कमरों की कमी का असर तब और अधिक महसूस होता है, जब किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो। एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाने से पढ़ाई का माहौल प्रभावित होने की आशंका रहती है। शिक्षकों के लिए भी अलग-अलग कक्षाओं को पढ़ाना, विद्यार्थियों पर व्यक्तिगत ध्यान देना और शिक्षण गतिविधियों का संचालन करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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20 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों पर भी बनेगी नीति
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर के अनुसार हिमाचल में करीब 60 प्रतिशत प्राथमिक और 65 प्रतिशत मिडिल स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या 20 से कम है। कुछ स्कूलों में तो एक-दो विद्यार्थी ही पढ़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में लगातार घटते नामांकन को देखते हुए सरकार ने कई योजनाएं शुरू की हैं और कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने की बात भी सामने आई है। मंत्री ने माना कि स्कूलों में कमरों और अन्य संसाधनों की कमी चिंताजनक है तथा इसे दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। वहीं, 20 से कम विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों के लिए अगले शैक्षणिक सत्र में नई नीति तैयार करने की योजना है।

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