विश्व क्षय रोग दिवस: हिमाचल को 2021 तक टीबी रोग मुक्त करने का लक्ष्य
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विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देशों के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश को 2025 तक टीबी रोग मुक्त करने की दिशा में कदम उठाए हैं। हिमाचल सरकार भी वर्ष 2021 अंत तक सूबे को टीबी रोग मुक्त करने का प्रयास कर रही है।
हिमाचल देश का पहला ऐसा राज्य हैं, जहां सभी जिला केंद्रों के अस्पतालों के अलावा कुछ उपमंडल स्तर के अस्पतालों में भी संभावित टीबी रोगियों के बलगम की जांच होती है। सीवीनेट में मरीज की बलगम में अगर एक भी कीटाणु टीबी रोग का होगा, वह भी जांच में पकड़ में आता है।
उधर, राज्य क्षय रोग कार्यक्रम अधिकारी डॉ. आरके बारिया ने कहा कि आने वाले दिनों में टीबी रोग की जांच के अभियान को और गति दी जाएगी। इसके अलावा जागरूकता कार्यक्रमों में भी तेजी जाने तक काम हो रहा है।
हर साल सामने आए हैं 17 हजार नये मामले
सूबे में टीबी रोग की जागरूकता को स्वास्थ्य विभाग ने इसी महीने टीबी मुक्त हिमाचल अभियान नाम से एक मोबाइल एप लांच किया। मई 2019 तक सूबे के 35 और सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में माइक्रोस्कोपी सेंटर खोले जाएंगे।
पंचायत स्तर पर फोरम गठित की जाएगी। पहले पंचायत, फिर खंड और जिला को टीबी रोग मुक्त किया जाएगा। फिर से घर-घर जाकर लोगों की जांच के लिए विशेष अभियान भी चलाए जाएंगे। इसके अलावा जो टीबी रोगी ठीक हुए हैं, उन्हें भी लोगों को जागरूक करने के मुहिम में जोड़ा जा रहा है।
प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग के पास टीबी रोग के लगभग 17 हजार नए मामले सामने आते हैं। कांगड़ा जिला के पालमपुर में विश्व क्षय रोग दिवस पर प्रदेश स्तरीय कार्यक्रम होगा। इसमें स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों की रेड एरो प्रतियोगिता का मूल्यांकन किया जाएगा।
किस जिले में कितने मामले
बिलासपुर-488
चंबा-1118
हमीरपुर-772
कांगड़ा-3461
किन्नौर-110
कुल्लू-1449
लाहौल-स्पीति-18
मंडी-2370
शिमला-2852
सिरमौर-861
सोलन-2223
ऊना-750