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Shimla News: फिटनेस के आधार पर टैक्सी परमिट जारी करे प्रदेश सरकार
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भारतीय मजदूर संघ का सरकार से आग्रह
परमिट की अवधि 15 से घटाकर 12 साल करने का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भारतीय मजदूर संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा टैक्सी परमिट की अवधि 15 से घटाकर 12 साल किए जाने का विरोध किया है। इसके साथ ही संघ ने गाड़ी की फिटनेस के आधार पर परमिट जारी करने की व्यवस्था किए जाने की मांग की है। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेशाध्यक्ष मदन राणा, महामंत्री यशपाल हेटा, उपमहामंत्री देवीदत्त तनवर, कोषाध्यक्ष अमी चंद डोगरा, उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, सुषमा शर्मा व रमेश राणा, प्रदेश सचिव सुमना देवी, नेक राम और नरेश ठाकुर ने एक संयुक्त बयान में कहा कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में टैक्सियों के परमिट की अवधि 20 से 25 वर्ष तक है। इस तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। यदि वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों को पूरा करता है, तो उसे फिटनेस के आधार पर परमिट जारी किया जाना चाहिए।नेताओं ने कहा कि एक तरफ टैक्सी ऑपरेटर टैक्स के रूप में सरकार के खजाने में योगदान देता है, तो दूसरी तरफ पर्यटन कारोबार को बढ़ावा देता है। एक टैक्सी ऑपरेटर 15 से 20 लाख रुपये तक का ऋण लेकर वाहन खरीदता है। वहीं टैक्सी का परमिट सिर्फ 12 साल तक दिए जाने के कारण ऑपरेटर इस अवधि में केवल बैंक कर्ज की किस्तें ही चुका पाता है। परमिट खत्म होने पर वह नई गाड़ी लेने की स्थिति में नहीं रहता। मजदूर संघ ने हिमाचल में टैक्सी परमिट फिटनेस के आधार पर जारी करने, पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर परमिट की अवधि 20 से 25 वर्ष करने तथा टैक्सी ऑपरेटरों और यूनियनों की समस्याओं को सुलझाने के लिए उनके साथ बैठक बुलाए जाने की मांग की।
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परमिट की अवधि 15 से घटाकर 12 साल करने का विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। भारतीय मजदूर संघ ने प्रदेश सरकार द्वारा टैक्सी परमिट की अवधि 15 से घटाकर 12 साल किए जाने का विरोध किया है। इसके साथ ही संघ ने गाड़ी की फिटनेस के आधार पर परमिट जारी करने की व्यवस्था किए जाने की मांग की है। भारतीय मजदूर संघ के प्रदेशाध्यक्ष मदन राणा, महामंत्री यशपाल हेटा, उपमहामंत्री देवीदत्त तनवर, कोषाध्यक्ष अमी चंद डोगरा, उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, सुषमा शर्मा व रमेश राणा, प्रदेश सचिव सुमना देवी, नेक राम और नरेश ठाकुर ने एक संयुक्त बयान में कहा कि पड़ोसी राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में टैक्सियों के परमिट की अवधि 20 से 25 वर्ष तक है। इस तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी यह व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। यदि वाहन निर्धारित फिटनेस मानकों को पूरा करता है, तो उसे फिटनेस के आधार पर परमिट जारी किया जाना चाहिए।नेताओं ने कहा कि एक तरफ टैक्सी ऑपरेटर टैक्स के रूप में सरकार के खजाने में योगदान देता है, तो दूसरी तरफ पर्यटन कारोबार को बढ़ावा देता है। एक टैक्सी ऑपरेटर 15 से 20 लाख रुपये तक का ऋण लेकर वाहन खरीदता है। वहीं टैक्सी का परमिट सिर्फ 12 साल तक दिए जाने के कारण ऑपरेटर इस अवधि में केवल बैंक कर्ज की किस्तें ही चुका पाता है। परमिट खत्म होने पर वह नई गाड़ी लेने की स्थिति में नहीं रहता। मजदूर संघ ने हिमाचल में टैक्सी परमिट फिटनेस के आधार पर जारी करने, पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर परमिट की अवधि 20 से 25 वर्ष करने तथा टैक्सी ऑपरेटरों और यूनियनों की समस्याओं को सुलझाने के लिए उनके साथ बैठक बुलाए जाने की मांग की।