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Shimla News: हाथों से साबुन बनाकर आत्मनिर्भर बन रहीं शकराह की महिलाएं
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एलोवेरा, हल्दी और चंदन के साबुन की बाजार में है मांग, महिलाएं लिख रहीं सशक्तिकरण की नई कहानी
प्रशिक्षण के दौरान 30 महिलाएं तैयार कर रही साबुन
खास खबर
दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी शिमला के घणाहट्टी के शकराह क्षेत्र की महिलाएं अब चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं। यहां ग्रामीण महिलाओं के हाथों से बने हर्बल साबुन उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं।
शकराह की 30 ग्रामीण महिलाएं इन दिनों साबुन बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। मास्टर ट्रेनर पूनम बंसल की देखरेख में यह महिलाएं एलोवेरा, हल्दी और चंदन जैसे प्राकृतिक तत्वों से केमिकल-फ्री साबुन तैयार कर रही हैं। महिलाओं द्वारा बनाए गए इन साबुनों को बाजार में बेचा जा रहा। इस पहल से महिलाओं की आर्थिकी को मजबूती मिल रही है। इससे पहले आयोजित प्रशिक्षण में भी महिलाओं ने साबुन बेचकर 25 हजार रुपये तक की कमाई की थी। वहीं प्रशिक्षण ले रहीं महिलाओं के इस नए बैच को बेहतर गुणवत्ता और पैकेजिंग के साथ इस बार और बेहतर कमाई की उम्मीद है। यह महिलाएं इस समय विभिन्न प्राकृतिक अर्कों से तरह-तरह के केमिकल-फ्री साबुन बनाना सीख रही हैं और बिक्री के लिए साबुन तैयार कर रही हैं। इसके बाद यही महिलाएं साबुन की पैकिंग और कीमत तय करेंगी।
हेल्पिंग हैंड संस्था की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण को सफल बना रहीं प्रशिक्षक पूनम बंसल ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सबसे पहले ग्लिसरीन बेस को पिघलाना सिखाया जाता है। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल, हल्दी पाउडर, चंदन और गुलाब जल जैसे प्राकृतिक तत्वों के अर्क मिलाए जाते हैं। फिर इसमें एसेंशियल ऑयल डालकर मिश्रण को सांचों में ढाला जाता है। उन्होंने बताया कि दो से तीन घंटे में ठंडा होने के बाद खुशबूदार और औषधीय गुणों वाला साबुन तैयार हो जाता है।
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प्रशिक्षण के दौरान 30 महिलाएं तैयार कर रही साबुन
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दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी शिमला के घणाहट्टी के शकराह क्षेत्र की महिलाएं अब चूल्हे-चौके तक सीमित नहीं हैं। यहां ग्रामीण महिलाओं के हाथों से बने हर्बल साबुन उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं।
शकराह की 30 ग्रामीण महिलाएं इन दिनों साबुन बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं। मास्टर ट्रेनर पूनम बंसल की देखरेख में यह महिलाएं एलोवेरा, हल्दी और चंदन जैसे प्राकृतिक तत्वों से केमिकल-फ्री साबुन तैयार कर रही हैं। महिलाओं द्वारा बनाए गए इन साबुनों को बाजार में बेचा जा रहा। इस पहल से महिलाओं की आर्थिकी को मजबूती मिल रही है। इससे पहले आयोजित प्रशिक्षण में भी महिलाओं ने साबुन बेचकर 25 हजार रुपये तक की कमाई की थी। वहीं प्रशिक्षण ले रहीं महिलाओं के इस नए बैच को बेहतर गुणवत्ता और पैकेजिंग के साथ इस बार और बेहतर कमाई की उम्मीद है। यह महिलाएं इस समय विभिन्न प्राकृतिक अर्कों से तरह-तरह के केमिकल-फ्री साबुन बनाना सीख रही हैं और बिक्री के लिए साबुन तैयार कर रही हैं। इसके बाद यही महिलाएं साबुन की पैकिंग और कीमत तय करेंगी।
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हेल्पिंग हैंड संस्था की ओर से आयोजित इस प्रशिक्षण को सफल बना रहीं प्रशिक्षक पूनम बंसल ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को सबसे पहले ग्लिसरीन बेस को पिघलाना सिखाया जाता है। इसके बाद इसमें एलोवेरा जेल, हल्दी पाउडर, चंदन और गुलाब जल जैसे प्राकृतिक तत्वों के अर्क मिलाए जाते हैं। फिर इसमें एसेंशियल ऑयल डालकर मिश्रण को सांचों में ढाला जाता है। उन्होंने बताया कि दो से तीन घंटे में ठंडा होने के बाद खुशबूदार और औषधीय गुणों वाला साबुन तैयार हो जाता है।
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