महिला की मौत मामले में अस्पताल के मालिक बोले - कुछ लोग साजिश के तहत कर रहे हैं बदनाम
आईजीएमसी शिमला में चिड़गांव की महिला की मौत मामले में संजीवनी अस्पताल रोहड़ू के मालिक डॉक्टर चिन्मय देव ने कहा कि वह हर जांच के लिए तैयार हैं। उनके अस्पताल में एचआईवी टेस्ट रैपिड कार्ड से किया गया। इसमें महिला दो बार पॉजिटिव पाई गई। अस्पताल ने कहीं पर इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया।
डॉ. चिन्मय ने रोहडू में प्रेस वार्ता में अपना पक्ष रखा कि 21 अगस्त को महिला को पेट दर्द की जांच के लिए लाया गया। अल्ट्रासाउंड में प्रेग्नेंसी एकटोपिक रेप्चर पाया गया। महिला में खून 5.8 ग्राम रह गया था।
प्रेग्नेंसी का पता चलने पर एचआईवी जांच रेपिड कार्ड किट में दो बार महिला पॉजिटिव पाई गई। रिपोर्ट को सार्वजनिक उनके अस्पताल ने नहीं किया। रैपिड कार्ड की रिपोर्ट आठ से दस प्रतिशत गलत हो सकती है। प्रदेश स्वास्थ्य विभाग के पास इसकी जानकारी रहती है।
उन्होंने कहा कि पीड़िता का उनके अस्पताल में ऑपरेशन संभव नहीं था, इसलिए मरीज को बडे़ अस्पताल के लिए रेफर किया गया। संजीवनी अस्पताल से रेफर रिपोर्ट में स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशानुसार एचआईवी पॉजिटिव का हवाला देना जरूरी था। डॉ. चिन्मय ने कहा कि महिला की मौत का मुख्य कारण समय पर आईसीयू उपलब्ध न होना रहा।
यदि आईसीयू समय पर मिला होता को शायद जान बच जाती। उन्होंने कहा कि कुछ नेता उनके अस्पताल को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। मृत्यु प्रमाण पत्र में महिला की मौत के कारण स्पष्ट लिखे गए हैं। महिला की मौत एचआईवी पॉजिटिव का पता होने से नहीं, अन्य कारणों से हुई है।