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Shimla News: विश्व बैंक से जारी 348 करोड़ कहां गए, विधानसभा में गूंजा मामला
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अमर उजाला असर...
भाजपा विधायक लोकेंद्र और इंद्रदत्त ने सरकार से पूछे सवाल, इससे पहले निगम के सदन में हो चुका है हंगामा
मंत्री ने दिया जवाब, सरकार ने शिफ्ट नहीं किया यह पैसा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की सतलुज पेयजल योजना के लिए विश्व बैंक से जारी हुआ करोड़ों रुपये आखिर कहां अटक गए, इस पर शुक्रवार को प्रदेश विधानसभा में भी सवाल उठे।
भाजपा ने पूछा कि जब बैंक पैसा जारी कर चुका है तो यह कंपनी को क्यों नहीं मिल रहा। कंपनी को ऋण क्यों लेना पड़ रहा है। बैंक से जब पैसा आया है तो कंपनी को मिलना चाहिए। आनी के भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार और बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने पूछा कि विश्व बैंक से अब तक 24 घंटे पेयजल योजना के तहत कितना बजट जारी हुआ है। यह पैसा कहां खर्च किया गया, क्या सरकार ने यह पैसा कहीं दूसरी जगह खर्च कर दिया है और कंपनी को लोन ऋण लेना पड़ रहा है। इसके जवाब में सरकार के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की ओर से जवाब दिया गया कि विश्व बैंक से अब तक 587.19 करोड़ रुपये की राशि जारी हो चुकी है। इसमें से सरकार ने कंपनी को 239.99 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा पिछले तीन साल से सरकार ने कंपनी को पानी और सीवरेज से जुड़े कामों के लिए 316 करोड़ रुपये और जारी किए हैं। दावा किया कि विश्व बैंक से जारी हुआ पैसा सरकार किसी भी दूसरे काम पर नहीं लगा रही है। कंपनी अपनी जरूरत के अनुसार लोन लेने की दिशा में कार्यवाही कर रही है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
आखिर कहां गया 348 करोड़ रुपये
विश्व बैंक की ओर से जारी 348 करोड़ रुपये आखिर कहां गए, इस पर सियासत गरमा गई है। भाजपा इससे पहले नगर निगम सदन में भी इस पर सवाल उठा चुकी है। भाजपा पार्षद कमलेश मेहता के अलावा कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने भी कंपनी को विश्व बैंक का पैसा न मिलने और ऋण लेने को लेकर सवाल उठाए थे। शिमला शहर में विश्व बैंक की मदद से 24 घंटे पानी देने की योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा सीवरेज नेटवर्क भी मजबूत किया जा रहा है। इस पूरी योजना पर करीब 1813 करोड़ रुपये खर्च होने हैं जिनमें 1100 करोड़ से ज्यादा पैसा विश्व बैंक देगा। बैंक ने 587 करोड़ दिए थे लेकिन इनमें से सिर्फ 239 करोड़ ही कंपनी तक पहुंचे हैं। अब काम आगे बढ़ाने के लिए कंपनी को मजबूरन 100 करोड़ रुपये ऋण लेना पड़ रहा है।
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भाजपा विधायक लोकेंद्र और इंद्रदत्त ने सरकार से पूछे सवाल, इससे पहले निगम के सदन में हो चुका है हंगामा
मंत्री ने दिया जवाब, सरकार ने शिफ्ट नहीं किया यह पैसा
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में 24 घंटे पानी देने की सतलुज पेयजल योजना के लिए विश्व बैंक से जारी हुआ करोड़ों रुपये आखिर कहां अटक गए, इस पर शुक्रवार को प्रदेश विधानसभा में भी सवाल उठे।
भाजपा ने पूछा कि जब बैंक पैसा जारी कर चुका है तो यह कंपनी को क्यों नहीं मिल रहा। कंपनी को ऋण क्यों लेना पड़ रहा है। बैंक से जब पैसा आया है तो कंपनी को मिलना चाहिए। आनी के भाजपा विधायक लोकेंद्र कुमार और बड़सर के विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने पूछा कि विश्व बैंक से अब तक 24 घंटे पेयजल योजना के तहत कितना बजट जारी हुआ है। यह पैसा कहां खर्च किया गया, क्या सरकार ने यह पैसा कहीं दूसरी जगह खर्च कर दिया है और कंपनी को लोन ऋण लेना पड़ रहा है। इसके जवाब में सरकार के लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह की ओर से जवाब दिया गया कि विश्व बैंक से अब तक 587.19 करोड़ रुपये की राशि जारी हो चुकी है। इसमें से सरकार ने कंपनी को 239.99 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके अलावा पिछले तीन साल से सरकार ने कंपनी को पानी और सीवरेज से जुड़े कामों के लिए 316 करोड़ रुपये और जारी किए हैं। दावा किया कि विश्व बैंक से जारी हुआ पैसा सरकार किसी भी दूसरे काम पर नहीं लगा रही है। कंपनी अपनी जरूरत के अनुसार लोन लेने की दिशा में कार्यवाही कर रही है। गौरतलब है कि अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
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आखिर कहां गया 348 करोड़ रुपये
विश्व बैंक की ओर से जारी 348 करोड़ रुपये आखिर कहां गए, इस पर सियासत गरमा गई है। भाजपा इससे पहले नगर निगम सदन में भी इस पर सवाल उठा चुकी है। भाजपा पार्षद कमलेश मेहता के अलावा कांग्रेस पार्षद सिमी नंदा ने भी कंपनी को विश्व बैंक का पैसा न मिलने और ऋण लेने को लेकर सवाल उठाए थे। शिमला शहर में विश्व बैंक की मदद से 24 घंटे पानी देने की योजना तैयार की जा रही है। इसके लिए सतलुज का पानी शिमला पहुंचाया जा रहा है। इसके अलावा सीवरेज नेटवर्क भी मजबूत किया जा रहा है। इस पूरी योजना पर करीब 1813 करोड़ रुपये खर्च होने हैं जिनमें 1100 करोड़ से ज्यादा पैसा विश्व बैंक देगा। बैंक ने 587 करोड़ दिए थे लेकिन इनमें से सिर्फ 239 करोड़ ही कंपनी तक पहुंचे हैं। अब काम आगे बढ़ाने के लिए कंपनी को मजबूरन 100 करोड़ रुपये ऋण लेना पड़ रहा है।
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