जब बिना बताए गुपचुप शिमला के स्कैंडल प्वाइंट पहुंच गए थे वाजपेयी
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की शिमला से जुड़ी कई रोचक यादें हैं। वर्ष 1985 में बिना बताए वह परिवार के साथ जन्मदिन मनाने 24 दिसंबर को शिमला चले आए थे। वाजपेयी के दौरे की भनक खुफिया एजेंसियों तक को नहीं लग पाई थी।
भाजपा नेताओं को जैसे ही पता चला वह लोअर बाजार से सीधे स्कैंडल प्वाइंट पहुंचे। यहां भाजपा नेताओं ने इनसे कहा कि अटल जी आपने हमें बताया ही नहीं बताया... तो वाजपेयी ने कहा कि पहले यह बताओ तुम्हें किसने बताया।
वाजपेयी से मुलाकात इन पलों को साझा करते हुए भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने बताया कि हम उनको स्कैंडल प्वाइंट पर देख दंग रह गए थे।
उन्हाेंने सिक्योरिटी वाले को भी दूरी बनाकर साथ चला रखा था। वह सीधे उनके साथ कालीबाड़ी मत्था टेकने गए।
वहां से आशीर्वाद लेकर लौटे और भाजपा नेता कृष्ण चंद शर्मा से मिले। हम उन्हें हरियाणा गेस्ट हाउस छोड़ने गए। उन्होंने कहा अब में रेस्ट करता हूं। दूसरे दिन वह अपने परिवार के साथ आशियाना में भोजन करने पहुंचे थे।
लो आज तो दो-दो ब्राहम्ण आ गए
गणेश दत्त और एक वरिष्ठ पत्रकार उनसे मिलने वहां पहुंचे तो वाजपेयी ने कहा कि आज तो दो-दो ब्राह्मण आ गए हैं। आओ हमारे साथ भोजन करो। खाना खाने के बाद उन्होंने आइसक्रीम कसाटा खाने की इच्छा जाहिर की तो जो वहां उपलब्ध नहीं थी।
गणेश दत्त ने कहा मैं लेकर आता हूं। जब वह लेकर आए तो उन्होंने कहा बताओ इसके पैसे कितने लगे, जब गणेश दत्त ने पैसे लेने से इंकार किया तो कहा कि आज के दिन मैं कुछ नहीं कहूंगा, तब उन्हें मालूम हुआ कि 25 दिसंबर को उनका जन्म दिन था।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी 1990 में प्रदेश में भाजपा की जीत के बाद पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार की दूसरी बार सरकार बनाने को विधायक दल का नेता चुनने के लिए शिमला आए थे।
वह यहां तीन दिन रुके। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष ने उनके इस दौरे की यादों को साझा करते हुए बताया कि उनके साथ दिल्ली के भाजपा नेता मदन लाल खुराना, वरिष्ठ भाजपा नेता जगदेव चंद ने आशियाना में भोजन किया।
दूसरे दिन ग्रैंड होटल में वाजपेयी ने भाजपा के विधायक दल की बैठक ली। यहां उन्होंने एक ही बात कही कि मैं विधायक दल का नेता चुनने आया हूं, कोई एक नाम सुझाओ, सभी ने शांता कुमार का नाम सुझाया।
नेता चुन लेने के बाद उन्होंने मौजूद सभी नेताओं को गुरुमंत्र दिया कि ब्यूरोक्रेसी एक बेलगाम घोड़ा होता है, इसलिए राजनेता के एक हाथ में चाबुक और एक में लगाम होनी चाहिए तो ही इसे काबू किया जा सकता है।
2001 में रिट्रीट में ठहरे थे अटल
ऐसा करने पर ही कुशलता पूर्वक शासन करना संभव है, ऐसा करने पर ही सही मायने में शासन सही चलता है और इसका लाभ जनता को मिल पाता है।अटल बिहारी वाजपेयी 2001 में शिमला आकर रिट्रीट में ठहरे थे। उन्होंने बाकायदा प्रेसवार्ता बुलाई थी।
भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश दत्त ने बताया कि उस समय भी वह अटल बिहारी वाजपेयी से मिलने रिट्रीट पहुंचे थे। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद गणेश दत्त अन्य भाजपा नेताओं के साथ उनसे मिलने पहुंचे।
गणेश दत्त ने कहा कि उनमें सबको साथ लेकर चलने, उनका मजाकिया अंदाज सबका मन मोह लेता था। वह संगठन के लिए पिता तुल्य थे। उनको कुशल राजनेता, प्रशासक और दूरदर्शी सोच के व्यक्तित्व के नाते विपक्ष भी उनका लोहा मानता था। इससे पहले वह 1998 में भी शिमला आए थे।
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 2003 में प्रदेश में विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार रैली के लिए शिमला आए थे। उन्होंने रिज मैदान से भाजपा प्रत्याशी गणेश दत्त के पक्ष में चुनावी रैली को संबोधित किया था।
इनके साथ भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोेद महाजन सहित अन्य वरिष्ठ नेता भी पहुंचे थे। इनके विचार सुनने को पूरे रिज पर हजारों की संख्या में भीड़ जुटी थी। वाजपेयी हिमाचल प्रदेश को अपना घर मानते थे।