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राज्य पक्षी जाजुराना का कुनबा बढ़ा, इस साल आए नौ नन्हें मेहमान

Sun, 26 Aug 2018 12:41 PM IST
मोहन मेहता, अमर उजाला,ज्यूरी (रामपुर बुशहर)
मोहन मेहता, अमर उजाला,ज्यूरी (रामपुर बुशहर) Updated Sun, 26 Aug 2018 12:41 PM IST
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western tragopan gave birth to nine chicks at sarahan rampur

पक्षी प्रेमियों के लिए खुशखबरी है। राज्य पक्षी जाजुराना का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। इस साल नौ और नए मेहमान आए हैं। सभी का जन्म प्राकृतिक रूप से हुआ है। पक्षीशाला में अब जाजुराना का कुनबा बढ़कर 40 हो गया है।

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जाजुराना संरक्षण के विश्व के एकमात्र केंद्र सराहन में पक्षियों की संख्या में वृद्धि के लिहाज से यह सबसे सफल वर्ष रहा है। पिछले साल भी 8 चूजों ने जन्म लिया था। 5 चूजों का जन्म प्राकृतिक तरीके से जबकि 3 चूजों का जन्म इनक्यूबेटर से हुआ था।
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पक्षीशाला में रोजमर्रा के कामकाज को वन विभाग ने एक टीम गठित की है। यह जंतु विज्ञानी एल नरसिम्हा के नेतृत्व में पक्षियों की देखभाल करती है। सबसे पहले सूर्योदय के समय पक्षियों को विशेष रूप से तैयार किया भोजन दिया जाता है।

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जाजुराना को संवेदनशील प्रजाति का दर्जा 

western tragopan gave birth to nine chicks at sarahan rampur

इसमें कटे फल, हरी सब्जियां, अंकुरित अनाज आदि प्रचुर मात्रा में रहते हैं। इसके बाद बड़े पिंजरों की सफाई की जाती है। दिन के समय पक्षीशाला का वातावरण शांत रहे और पक्षियों की दिनचर्या में कोई खलल न पड़े, इस पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

पक्षियों की गतिविधियों पर सीसीटीवी से नजर रखी जाती है। ब्रीडिंग सीजन (प्रजनन के मौसम) के दौरान पक्षियों के पिंजरे के अंदर घोंसला तैयार किया जाता है। नवजात चूजों के चलने-फिरने को लकड़ियों से घोंसले से नीचे उतरने के रास्ते भी तैयार किए गए हैं। 

अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण समिति ने जाजुराना (वेस्टर्न ट्रैगोपान) को संवेदनशील प्रजाति का दर्जा दिया है। इस प्रजाति का संरक्षण न होने से जाजुराना के दुनिया से विलुप्त होने का खतरा हो गया है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2007 में इसे राज्य पक्षी घोषित किया था।

इनक्यूबेटर विधि से जाजुराना के चूजों के जन्म का विश्व में पहला सफल प्रयास

western tragopan gave birth to nine chicks at sarahan rampur

शुरू में शिकार से बचाए गए कुछ पक्षियों का संरक्षण कर उन्हें तंदुरुस्त किया गया। इसके बाद नैसर्गिक तरीके से ब्रीडिंग कराकर उनकी संख्या बढ़ाने का प्रयास किया गया। 

इनक्यूबेटर विधि से जाजुराना के चूजों के जन्म का विश्व में पहला सफल प्रयास है। पक्षीशाला की वर्ष 2017 की गतिविधियां एक किताब के रूप में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आरसी कंग एवं मुख्य अरण्यपाल वन्य प्राणी सुशील कापता ने हाल ही में रिलीज की हैं।

पक्षीशाला का मुख्य उद्देश्य प्रजनन से पक्षियों की संख्या बढ़ाकर उन्हें धीरे-धीरे उनके प्राकृतिक वातावरण में छोड़ना है। जाजुराना की देखरेख में विभाग ने 4 स्थायी कर्मचारी, एक जंतु विज्ञानी, दो फॉरेस्ट गार्ड, एक एनिमल अटेंडेंट और कुछ अस्थायी कर्मचारी तैनात किए हैं।  - सुशील काप्टा, सीसीएफ, वाइल्ड लाइफ 
                       

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