फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   water supply in shimla

Shimla News: ठेकेदार कंपनी पर मेहरबानी के बीओडी में भी उठे थे सवाल, मेयर ने तलब की रिपोर्ट

Sun, 06 Sep 2026 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 06 Sep 2026 11:58 PM IST
विज्ञापन
water supply in shimla
जल में छल...
विज्ञापन

राजधानी की 24 घंटे पानी देने की योजना में ठेकेदार कंपनी पर मेहरबानी का मामला
महापौर ने आज कंपनी के अधिकारियों की बुलाई बैठक, योजना की पूरी रिपोर्ट मांगी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में जांच के दायरे में आई 24 घंटे पानी देने की योजना को लेकर महापौर सुरेंद्र चौहान ने सोमवार को पेयजल कंपनी के अधिकारियों की बैठक बुला ली है। कंपनी के अधिकारियों से इस योजना पर पूरा रिकॉर्ड पेश करने को कहा है।
टाउनहॉल में होने वाली इस बैठक में सतलुज पेयजल योजना बंद होने, शहर में पानी की राशनिंग से लेकर 24 घंटे पानी देने की योजना के काम की रिपोर्ट मांगी गई है। महापौर कंपनी में अधिकारियों के बीच मचे घमासान को लेकर भी रिपोर्ट लेंगे। इस योजना के काम में देरी का मामला महापौर सुरेंद्र चौहान ने ही सबसे पहले उठाया था। 13 अगस्त को हुई पेयजल कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में महापौर ने योजना के काम में देरी और ठेकेदार कंपनी पर पेनल्टी न लगाने को लेकर सवाल उठाए थे। महापौर का कहना है कि शहर में 24 घंटे पानी देने की योजना का काम टारगेट के अनुसार नहीं हो रहा है। वार्डाें में खोदी गई सड़कें और रास्ते तक मरम्मत नहीं किए जा रहे हैं। काम में देरी के लिए ठेकेदार कंपनी पर पेनल्टी न लगाने पर बीओडी के कई और सदस्यों ने भी बैठक में आपत्ति जताई थी। बावजूद इसके पेयजल कंपनी ने ठेकेदार कंपनी पर मेहरबानी दिखाई। दावा किया कि चार करोड़ की पेनल्टी लगाई जा चुकी है। हालांकि, समझौते के अनुसार अब यह पेनल्टी 23 करोड़ से ज्यादा बनती है।
विज्ञापन


ठेकेदार की बजाय खुद गलती मानने लगी कंपनी
शहर में 24 घंटे पानी देने की योजना में देरी को लेकर उठे सवाल के बीच पेयजल कंपनी अब इसके लिए खुद को ही जिम्मेदारी ठहरा रही है। कंपनी का तर्क है कि ठेकेदार को काम तो सौंपा गया लेकिन साइट क्लीयरेंस और जरूरी अनुमति लेने में देरी हुई। कंपनी को डर है कि यदि ज्यादा पेनल्टी लगाई गई तो योजना विवादों में घिर सकती है। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहे हैं कि काम में देरी के लिए कंपनी के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। 972 करोड़ की इस योजना की हर हफ्ते विधायक बैठक लेते हैं। मेयर से लेकर मंत्री तक भी कई बार बैठकें ले चुके हैं। नगर निगम सड़क खोदाई की एनओसी पहले ही जारी कर चुका है। बावजूद इसके योजना का काम लटकाया जा रहा है। वहीं, काम लटकाने के बावजूद कार्रवाई तक नहीं होती।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed