Water Crisis Shimla: पेयजल सप्लाई ठप, टैंकरों से पानी लेने के लिए रात-दिन धक्के खाने को मजबूर शहरवासी
चार साल बाद शहर के कई इलाकों में हालात ऐसे हुए हैं कि अब लोगों को टैंकर के जरिये पीने लायक पानी दिया जा रहा है। कई इलाकों में तीसरे और चौथे दिन भी पानी नहीं मिल रहा।
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दिन : सोमवार। समय दोपहर 03:15 बजे। शहर के खलीनी वार्ड के लोअर झंझीड़ी इलाके में चौथे दिन भी पानी नहीं आया है। लोगों की मांग पर कंपनी ने यहां छोटा टैंकर भेजा है। टैंकर जैसे ही बस स्टॉपेज पर पहुंचा, लोग खाली डिब्बे और बाल्टियां लेकर दौड़ पड़े। चंद मिनटों में ही टैंकर खाली हो गया। कई लोगों की बाल्टियां आधी ही भर पाईं है। मौके पर मौजूद सुनील, अमित और मनमोहन ने बताया कि इस क्षेत्र में चार दिन से पानी नहीं आया है। ऐसे में अब टैंकर मंगवाना पड़ा है। यहां सड़क तंग है, ऐसे में छोटा ही टैंकर पहुंच पाया है। लोअर खलीनी में भी पानी का संकट है। लोगों ने बताया कि रविवार तीसरे दिन भी शाम तक जब पानी नहीं आया तो पार्षद पूरनमल ने टैंकर मंगवाया। रात 10:00 बजे वार्ड में पानी भरने के लिए टैंकर के सामने लाइनें लगी रहीं। पार्षद ने बताया कि देर रात टैंकर के बाद इस इलाके में पानी की सप्लाई भी मिल गई थी। इसमें जिन घरों में पानी नहीं आया, वहां सोमवार को टैंकर भेजा गया। शहर में टैंकरों की मांग 50 का आंकड़ा पार कर गई है। सोमवार को 51 टैंकरों की मांग पेयजल कंपनी को मिली है। कंपनी के पास पांच टैंकर हैं। इन्हें सुबह आठ से रात 12 बजे तक पानी देने के काम में लगाया जा रहा है।
सबसे बड़े गर्ल्स स्कूल पोर्टमोर में संकट
समय : दोपहर 12:10 बजे। राजधानी के सबसे बड़े गर्ल्स स्कूल पोर्टमोर में दो दिन से पानी नहीं है। सूचना मिलने के बाद कंपनी ने स्कूल के लिए एक टैंकर भेजा है। आठ हजार लीटर क्षमता वाले टैंकर से जैसे ही स्कूल की टंकियों में पानी छोड़ा जाता है स्कूल परिसर में बने नलकों के सामने पानी भरने के लिए छात्राओं की भीड़ लग जाती है। मौके पर स्कूल के लैब अटेंडेंट एलडी वर्मा टंकियां चेक कर रहे हैं। 13 टंकियां लगी हैं। यह सभी खाली हैं। एलडी वर्मा बताते हैं कि तीसरे चौथे दिन जो पानी आ रहा है, उससे 13 में से तीन चार टंकियां ही भर पाती हैं। स्कूल में 1800 से ज्यादा छात्राएं पढ़ रही हैं। स्कूल के एक भवन में मिड डे मील का खाना भी पक रहा है। इंचार्ज संजय कुमार ने बताया कि कई बार पानी न होने से खाना बनाने में भी दिक्कत आती है। सोमवार को भेजे टैंकर से भी करीब दो ही टंकियां भर पाईं। यह हाल सिर्फ पोर्टमोर का नहीं बल्कि बाकी स्कूलों का भी है। पानी न आने से शौचालय बंद करने पड़े हैं। बच्चों को घर से ही पानी लाने को कहा जा रहा है।
इसलिए है ज्यादा मारामारी
शहर के जिन इलाकों में तीसरे दिन पानी आ रहा है, वहां प्रेशर नहीं बन पा रहा। टंकियां आधी भी नहीं भर पाती कि सप्लाई बंद हो जाती है। पर्यटकों के बढ़ने से होटलों में पेयजल खपत बढ़ी है। कई भवन मालिकों ने एक कनेक्शन पर कई किरायेदार रखे हैं। तीसरे और चौथे दिन पानी आने पर मकान मालिक, किरायेदारों को पानी नहीं दे रहे। यह टैंकर से पानी भर रहे हैं।
लोग बोले, अब तो पीने के लिए भी खरीदना पड़ रहा पानी
पांचवें दिन आ रहा है पानी
नेरीधार, गाहन में चौथे और पांचवें दिन पानी मिल रहा है। यहां हैंडपंप और बावड़ी भी नहीं है जिससे लोग पानी भर सके। मजबूरन पीने के लिए पानी खरीदना पड़ रहा है।
नरेंद्र ठाकुर, पूर्व पार्षद भट्ठाकुफर
पीने लायक पानी भी नहीं मिल रहा
टुटू में अब पीने लायक पानी भी नहीं मिल रहा। जलशक्ति विभाग से छठे-सातवें दिन सप्लाई मिल रही है। इसमें जिनके कंपनी के कनेक्शन हैं, उन्हें भी चौथे दिन पानी आता है। -जयचंद, टुटू
बंदरबांट रुके, सबको दो पानी
शहर में पानी का सही वितरण नहीं हो रहा। कुछ इलाकों में पांचवें दिन पानी आ रहा है तो कहीं तीसरे दिन। बंदरबांट रुकनी चाहिए। कंपनी को व्यवस्था सुधारनी चाहिए।
-राकेश कुमार, टुटू
10 जून के बाद नहीं आया पानी
पंचायती क्षेत्र शकराला के ज्यादातर इलाकों में पेयजल कंपनी का पानी आता है। 10 जून से पानी नहीं आया। चौथे और पांचवें दिन भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है।
-अनिल सरस्वती, शकराला
चार साल बाद ऐसा संकट देखा
शहर में चार साल बाद ऐसा संकट देखने को मिल रहा है। लोगों को हजारों रुपये देकर टैंकरों से पानी मंगाना पड़ रहा है। सरकार को नियमित सप्लाई देने के लिए कदम उठाने चाहिए।
सुशील शर्मा, टुटू
कहां से कितना पानी मिला
परियोजना कितना मिला कितना मिलता था
गुम्मा 16.05 24 एमएलडी
गिरि 15.70 18 एमएलडी
चूरट 1.91 3 एमएलडी
सियोग 0.02 1 एमएलडी
चैड़ 0.60 2 एमएलडी
कोटी बरांडी 1.65 5 एमएलडी
शिमला में जलसंकट और कंपनी के अफसर दिल्ली में कर रहे मंथन
राजधानी में कंपनी के कुप्रबंधन से शहर में चार साल बाद फिर पेयजल व्यवस्था टैंकरों के सहारे हो गई है। 36 एमएलडी की सप्लाई मिलने के बावजूद शहर की जनता को टैंकरों के सामने डिब्बे और बाल्टियां लेकर पानी भरना पड़ रहा है। नियमित सप्लाई देने का कंपनी का हर दावा फेल हो गया है। परियोजनाओं की व्यवस्था देखने, पंपिंग बढ़ाने और शहर में वितरण का जिम्मा कंपनी के जिन अफसरों पर है वह दिल्ली में बैठकर मंथन कर रहे हैं। कंपनी के अनुसार 24 घंटे पानी देने के प्रोजेक्ट की डीपीआर दिल्ली में तैयार की जा रही है। एक हफ्ते से एजीएम और दो सहायक अभियंता दिल्ली में हैं। राजधानी में पानी का संकट न हो, इसके लिए हर गर्मी के मौसम में प्लान बनता था।
गिरि से सप्लाई न घटे, इसके लिए आसपास के जलस्रोतों को इसमें मिलाया जाता था। जेसीबी से गहराई में गया पानी पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाते थे। गिरि के आसपास की कूहलें किसानों से बात कर कुछ समय के लिए बंद करवाई जाती थी। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हुआ। पार्षद भी कह रहे हैं कि जलशक्ति विभाग के अफसरों को ही यह जिम्मेदारी देनी चाहिए। शहर में पानी की सप्लाई में भी बंदरबांट का अंदेशा है। 46 एमएलडी से पूरे शहर को पानी दिया जा सकता है। लेकिन अब कंपनी 36 एमएलडी से आधे शहर में भी सप्लाई नहीं दे पा रही। शहर के खलीनी, टुटू, मज्याठ, भट्ठाकुफर, नेरीधार और चौड़ा मैदान क्षेत्र में पानी की ज्यादा समस्या है। खलीनी पार्षद पूरनमल ने कहा कि कंपनी के एजीएम फोन उठाने तक की जहमत नहीं उठाते। अब शिकायत किससे करें।
आज से फिर तीसरे दिन पानी का दावा
कंपनी ने मंगलवार से फिर से एक दिन छोड़कर पानी देने का दावा किया है। कंपनी का कहना है कि यह शेड्यूल लागू किया जाएगा। सोमवार को भी तय शेड्यूल के मुताबिक ज्यादातर इलाकों में पानी दे दिया है। मंगलवार को शहर के पंथाघाटी, सरघीण, न्यू शिमला, बीसीएस, निगम विहार, मजीठा हाउस, कनलोग, ऐरा होम, एसडीए, मैहली, गाहन, संजौली बाजार, इंजनघर, सांगटी, ढली बाजार, भराड़ी, कैलस्टन, लक्कड़ बाजार, यूएस क्लब, नाभा, फागली, टुटू, चक्कर, चौड़ा मैदान, रामनगर, फिंगास्क क्षेत्र में पानी दिया जाएगा।
पंचायती क्षेत्रों में ज्यादा संकट
शहर में तीसरे और चौथे दिन कंपनी पानी दे रही है। लेकिन मैहली, टुटू और मज्याठ में जलशक्ति विभाग के उपभोक्ताओं को छठे और सातवें दिन पानी दिया जा रहा है। इन इलाकों में लोग बावड़ी और हैंड पंप से पानी भरने को मजबूर हैं।