ग्राउंड रिपोर्ट: इनकी लापरवाही से है शिमला शहर में पानी का संकट
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भरपूर पानी होने के बावजूद शिमला शहर की जनता पानी को तरस रही है। कहीं चौथे तो कहीं छठे दिन पानी मिल रहा है। आखिर जनता के हिस्से का पानी कहां जा रहा है? कौन इसके लिए जिम्मेदार है? इसकी असली वजह जानकर मेयर-डिप्टी मेयर समेत सभी पार्षद भी हैरान रह गए। नगर निगम का कार्यभार संभालने के दूसरे ही दिन नए मेयर कुसुम सदरेट और डिप्टी मेयर राकेश शर्मा पार्षदों समेत बुधवार को शिमला की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना का हाल जानने गुम्मा पहुंचे।
दोपहर 12:25 मिनट पर मेयर-डिप्टी मेयर समेत 18 पार्षद गुम्मा पहुंचे। चाय पान के तुरंत बाद करीब 12:50 मिनट पर सभी प्रोजेक्ट का जायजा लेने निकल पड़े। कर्मचारियों ने सबसे पहले वर्ष 1921 के अंग्रेजों के जमाने के बने टैंक दिखाए जिससे शिमला शहर को पानी की सप्लाई होती थी। सभी पार्षद इनकी मशीनरी, फिल्टर सिस्टम और पंपिंग को लेकर बेहद उत्सुक लग रहे थे।
लेकिन जैसे जैसे आगे बढ़े तो प्रोजेक्ट की खामियां जानकर इनकी उत्सुकता निराशा में बदलने लगी। पता चला कि ज्यादातर पंप खराब पड़े हैं। फिल्टर सिस्टम भी अरसे से नहीं बदला गया है। जगह-जगह लीकेज हो रही है। जिस परियोजना से करीब 21 एमएलडी तक पानी देकर शिमला की प्यास बुझ सकती है उससे आजकल महज 11-14 एमएलडी पानी की सप्लाई होती है। करीब एक घंटे प्रोजेक्ट का जायजा लेने के बाद खस्ताहाल व्यवस्था देखकर पार्षद मौके पर मौजूद स्टाफ से सवाल दागने लगे।
मौके से गायब रहे अधिकारी, भड़के पार्षद
सूचना के बावजूद कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं था। मेयर ने कर्मचारियों से पूछा कि लीकेज में कितना पानी व्यर्थ बह रहा है और इसका कारण क्या है। तो कर्मचारियों ने कहा कि ये तो एसई साहब ही बता पाएंगे। इस पर पार्षद भड़क गए। इंजनघर वार्ड से पार्षद आरती चौहान ने पूछा कि आखिर सूचना के बावजूद एमई और एसई मौके पर क्यों नहीं आए।
हम क्या यहां खाना खाने आए हैं। हमें बताना चाहिए था कि आखिर खराब पंप क्यों ठीक नहीं करवाए जाते। बिल्डिंग की मरम्मत आज तक क्यों नहीं करवाई। पार्षद किरण बाबा ने कहा कि 31 साल में ये सिस्टम क्यों नहीं बदला। क्यों नई मशीनरी यहां नहीं लगवाई।
16 में से सिर्फ 3 ही पंप कर रहे काम
गुम्मा परियोजना में कुल 16 पंप लगाए गए हैं। मगर इनमें से सिर्फ 3 ही चालू अवस्था में हैं। निगम की रिपोर्ट के अनुसार एक पंप स्टैंडबाई पर रखा है। बाकी सब खराब पड़े हैं। ओल्ड गुम्मा पंप हाउस में सभी चारों पंप खराब पड़े हैं।
यदि ये सभी चालू हो जाएं तो शिमला शहर की सारी पानी की डिमांड गुम्मा परियोजना से ही पूरी हो सकती है। हर रोज भारी मात्रा में पानी लीकेज में बर्बाद हो रहा है।
अधूरा स्टाफ, सेलरी भी समय पर नहीं मिलती
इस प्रोजेक्ट में कर्मचारियों के दर्जनों पद खाली चल रहे हैं। जो कर्मचारी ठेके पर रखे गए हैं, उन्हें समय पर सेलरी नहीं मिलती। प्रोजेक्ट में तैनात कर्मचारी प्रदीप ठाकुर ने मेयर को बताया कि कई कर्मियों को छह महीने तक सेलरी नहीं मिलती।
यहां स्वीकृत पदों की संख्या करीब 150 हैं मगर 80 से ज्यादा पद खाली हैं। कर्मचारियों के आवास खस्ताहाल में हैं। उन्होंने मेयर से इस बारे में कदम उठाने की मांग की।
पूरे शिमला की प्यास बुझा सकती है गुम्मा परियोजना
शिमला शहर को करीब 45 एमएलडी पानी की जरूरत होती है। गुम्मा प्रोजेक्ट की क्षमता 20.77 एमएलडी है। मगर यह तब जब यहां 4 से 6 पंप चालू रहते हैं। प्रोजेक्ट में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि यदि सभी 16 पंप चालू हालत में होें और लीकेज दुरुस्त करवाई जाए तो तकरीबन 35 एमएलडी पानी यहां से सप्लाई हो सकता है।
हमने एस्टीमेट भेजा है
एसडीओ मस्त राम चौहान ने बताया कि यहां जो पंप खराब पड़े हैं उन्हें ठीक करवाने की सूचना भेजी गई है। हिमाचल में यह मशीनरी ठीक नहीं होती। दिल्ली जाकर इसे ठीक करवाना पड़ता है। इसमें समय लग जाता है। उन्होंने कहा कि लीकेज ज्यादा नहीं है।
16 में से 12 पंप खराब
फिल्टर चेंज नहीं किए
60000 लीटर पानी की लीकेज
80 से ज्यादा कर्मचारियों के पद खाली
पेयजल संकट पर राजनीति हावी, बंट गए पार्षद
शहर की सबसे बड़ी समस्या पेयजल संकट पर आखिरकार राजनीति हावी हो गई। जनता से पेयजल किल्लत दूर करने का वायदा करने वाले कांग्रेसी और वामपंथी पार्षद नगर निगम के इस दौरे से गायब रहे। वहीं, हाल ही में भाजपा में शामिल हुए कच्चीघाटी के पार्षद संजय परमार भी गुम्मा नहीं पहुंचे।
उम्मीद जताई जा रही थी कि सभी पार्षद सबसे पहले पानी की समस्या के असली कारणों का पता लगाएंगे और मिलकर इन्हें दूर करने की कोशिश करेंगे। मगर ऐसा नहीं हुआ। कांग्रेसी पार्षदों ने गुम्मा जाना जरुरी नहीं समझा। नगर निगम प्रशासन ने मंगलवार को बाकायदा सभी पार्षदों को लैटर जारी कर इस दौरे के बारे में सूचना दी थी। सभी पार्षदों के शिमला से गुम्मा जाने के लिए वाहनों की व्यवस्था भी की गई थी।
मगर बुधवार सुबह निगम अधिकारियों ने जैसे ही इन्हें फोन घुमाए तो एक के बाद एक सबने गुम्मा जाने से इंकार कर दिया। कई पार्षदों ने तो फोन तक नहीं उठाए। इस पर मेयर कुसुम सदरेट ने कहा कि सभी को इस दौरे पर आना चाहिए था। भाजपाई पार्षदों ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेसी पार्षदों के वार्ड में या तो पानी की समस्या नहीं है या फिर वे इसे उठाना नहीं चाहते।
कांग्रेसी पार्षद बोले, देखते हैं इस दौरे से कितना पानी मिलता है?
जाखू से कांग्रेस पार्षद अर्चना धवन ने कहा कि उन्हें दौरे की सूचना मिली थी मगर वे नहीं गई। कहा कि पानी की समस्या ऐसे दौरों से दूर नहीं होगी। देखेंगे कि उनके दौरे से शहर में कितनी समस्या दूर हुई। सांगटी से कांग्रेसी पार्षद मीरा शर्मा ने कहा कि उन्हें दौरे को लेकर लैटर मिला था। मगर सोचा कि ये भाजपा की रैली होगी और इसमें उनके कार्यकर्ता आएंगे, इसलिए हम नहीं गए। हम कभी और इस प्रोजेक्ट का दौरा करेंगे।
मेयर ने आयुक्त से मांगी रिपोर्ट
वहीं, इस दौरे के बाद कई खामियां सामने आई हैं। मेयर कुसुम सदरेट ने निगम आयुक्त से गुम्मा पंपिंग स्टेशन की स्टेट्स रिपोर्ट उपलब्ध करवाने को कहा है। मेयर ने कहा कि प्रोजेक्ट के लिए पानी तो पर्याप्त है मगर खराब पंपों के चलते भविष्य में यह समस्या और बढ़ सकती है। ऐसे में इस पर काम किया जाना चाहिए।