राज्यसभा में गूंजेगा हिमाचल में पेयजल संकट का मुद्दा
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कुछ माह पहले राजधानी शिमला में गंभीर पेयजल संकट पैदा होने की वजह से दुनिया भर में हिमाचल की किरकिरी का मामला अब राज्यसभा में भी गूंजेगा। कांगड़ा सीट से राज्यसभा सांसद विप्लव ठाकुर ने पानी के संकट का मुद्दा सदन में उठाया है।
विप्लव ठाकुर ने प्रश्न लगाकर सदन से पूछा है कि केंद्र सरकार का हर घर को पानी देने का दावा कहां तक और कैसे जमीनी स्तर पर सफल हो पाया है। इसी संदर्भ में विप्लव ने पूछा है कि हिमाचल में उभरे गंभीर पेयजल संकट का निवारण कहां तक हो पाया है।
ऐसे गंभीर पेयजल संकट से निपटने के लिए भविष्य में केंद्र सरकार की क्या योजना है। विप्लव ठाकुर राज्यसभा के सदन में शिमला में पेयजल संकट पर तारांकित प्रश्न पूछना चाह रही थीं ताकि उस पर अनुपूरक प्रश्न पूछे जा सकें।
लेकिन, विप्लव के प्रश्न को अतारांकित बनाकर उसका जवाब अब लिखित में दिया जाएगा। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में विप्लव ठाकुर ने कहा कि अब उन्हें जवाब लिखित में मिलेगा।
ज्य सरकार से वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मांगी
उन्होंने तारांकित प्रश्न पूछा था। लेकिन, इसे अतारांकित प्रश्न में तब्दील कर दिया गया। विप्लव के प्रश्न पर हिमाचल के धर्मशाला स्थित केंद्रीय भूजल बोर्ड के दफ्तर से भी प्रदेश में पेयजल संकट को लेकर रिपोर्ट मांगी गई थी।
केंद्रीय भूजल बोर्ड ने राज्य सरकार से वस्तुस्थिति की रिपोर्ट मांगी है। गौरतलब है कि कुछ माह पहले शिमला में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की वजह से हजारों लोग सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतर आए थे।
हालात बेकाबू होने पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश आधी रात को सड़कों पर निकलकर व्यवस्था संभालने में लग गए थे। नगर निगम के सदन में जबरदस्त हंगामा हुआ था। शिमला में पानी न मिलने की वजह से पर्यटकों को दूसरे पर्यटन स्थलों का रुख करना पड़ा था। इससे दुनिया भर में हिमाचल की किरकिरी हुई थी।