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शिमला के लोगों को अभी नहीं मिलेंगे पानी के बिल
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Tue, 17 Nov 2015 10:05 AM IST
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पानी के मासिक बिल जनरेट करने के लिए बनाया जा रहा नगर निगम का नया साफ्टवेयर अभी तक तैयार नहीं हो पाया है। साफ्टवेयर तैयार न होने से नवंबर माह के पानी के बिल निर्धारित समय में जारी होने पर संशय पैदा हो गया है। नगर निगम ने नवंबर माह से शहर के 30 हजार घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को मासिक बिल जारी करने घोषणा की थी लेकिन पहले ही महीने में निगम की योजना दम तोड़ती नजर आ रही है।
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नगर निगम के पानी के बिल जारी करने वाले साफ्टवेयर में खामी के चलते अक्तूबर में गलत बिल जारी हो गए थे। बिल दुरुस्त करने के लिए शहर के लोगों को निगम कार्यालय के चक्कर काटने पड़े। निगम की गलती से शहर के हजारों उपभोक्ताओं पर सरचार्ज के रूप में 75 रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा। गलती को सुधारते हुए निगम ने नवंबर माह में नए साफ्टवेयर तैयार कर मासिक बिल जनरेट करने का दावा किया था।
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यह भी घोषणा की थी कि उपभोक्ताओं से वसूला 75 रुपये अतिरिक्त सरचार्ज भी नवंबर के बिल में ऐडजस्ट किया जाएगा। ऐसे लोगों को जिन्होंने अतिरिक्त सरचार्ज चुकाया है नवंबर में 375 रुपये के स्थान पर 300 रुपये बिल जारी किया जाएगा। लेकिन नवंबर में अब तक नगर निगम का न तो साफ्टवेयर तैयार हो पाया है और न ही बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो पाई है। ऐसे में यदि नगर निगम नवंबर का बिल जारी नहीं करता है तो दिसंबर में लोगों पर दो महीने के बिल का बोझ पड़ना तय है।
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बनाया जा रहा है नया साफ्टवेयर : पंकज
पानी के बिल जनरेट करने के लिए नया साफ्टवेयर बनाने का काम अभी चल रहा है। नया साफ्टवेयर तैयार होेने के बाद इस महीने के अंत तक बिल जारी करने की कोशिश की जाएगी।- पंकज राय आयुक्त, नगर निगम
डोर टू डोर बिल देने का किया था दावा
नगर निगम ने अक्तूबर माह में शहर के लोगों को डोर टू डोर पानी के बिल उपलब्ध करवाने का दावा किया था, लेकिन 300 से अधिक लोगों को बिल नहीं मिले। नवंबर के बिल सैहब सोसायटी के सुपरवाइजरों के जरिये लोगों के घरों तक पहुंचाए जाने थे लेकिन आधा महीने बीतने के बाद भी अभी तक बिल जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
मैसेज से बिल देने की योजना ठंडे बस्ते में
सितंबर में नगर निगम ने शहर के लोगों को पानी के बिल मैसेज के जरिये उपलब्ध करवाने की घोषणा की थी। नवंबर से योजना लागू होनी थी लेकिन अभी तक योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। नगर निगम ने पानी के बिलों के साथ उपभोक्ताओं से उनके मोबाइल नंबर लेने की प्रक्रिया शुरू तो की थी लेकिन इसे भी अधर में ही छोड़ दिया गया।