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बिजली, कूड़े के बाद अब पेयजल में राहत का प्रस्ताव

Tue, 08 Mar 2022 11:38 PM IST
Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:38 PM IST
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water bill can be decreased
चुनावी साल में भाजपा तैयार कर रही प्रस्ताव, कंपनी की बीओडी की बैठक में हो सकता है फैसला
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में बिजली और कूड़े के बाद अब पेयजल बिलों में भी राहत देने की तैयारी चल रही है। स्लैब में बदलाव कर जनता को यह राहत दी जा सकती है। इस माह होने वाली पेयजल कंपनी के निदेशक मंडल की बैठक में एमसी सदन से पारित किए राहत देने के प्रस्ताव पर फैसला लिया जा सकता है।
सदन ने 10 किलोलीटर तक मुफ्त पानी देने समेत स्लैब दरों में कटौती करने का प्रसताव पारित किया था। चुनावी साल को देखते हुए भाजपा भी पेयजल बिलों में राहत देने का प्रस्ताव तैयार करने में जुट गई है। महापौर समेत कई भाजपा पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर अपने सुझाव दिए हैं। महापौर सत्या कौंडल ने स्लैब में बदलाव कर शहरवासियों को पेयजल बिलों में राहत देने का सुझाव दिया है।
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कैथू से भाजपा पार्षद सुनील धर ने हर महीने पांच किलोलीटर तक मुफ्त पानी देने का सुझाव दिया है। 30 किलोलीटर तक 12 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से बिल जारी करने का सुझाव रखा है। अभी 20 किलोलीटर तक 16.50 जबकि 21 से 30 किलोलीटर तक 27.50 रुपये प्रति किलोलीटर की दर से बिल जारी किया जाता है। पार्षद संजय परमार और विवेक शर्मा भी सस्ते पेयजल का प्रस्ताव ला चुके हैं। पार्टी अपने स्तर पर भी राहत देने को लेकर विकल्पों पर विचार कर रही है।
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नगर निगम चुनाव से ठीक पहले यदि बिजली और कूड़े की तर्ज पर पेयजल बिलों में भी शहरवासियों को राहत मिलती है तो इससे भाजपा का मिशन रिपीट का दावा और मजबूत हो जाएगा। एमसी के मई जून में चुनाव होने हैं। 31 सालों में पहली बार 2017 में भाजपा ने नगर निगम पर कब्जा किया था। महापौर सत्या कौंडल ने कहा कि पेयजल बिलों में राहत देने के लिए स्लैब में बदलाव करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस पर जल्द निदेशक मंडल से भी मंजूरी ली जाएगी।

पेयजल पर घेरने की तैयारी में कांग्रेस
शहर में महंगे पेयजल और मर्ज एरिया में सस्ते कनेक्शन न देने को लेकर कांग्रेस भी भाजपा को घेरने की तैयारी कर रही है। एमसी सदन में इसी माह सस्ते पेयजल को लेकर हंगामा होने वाला है। विपक्षी पार्षदों ने इसके लिए तैयारी कर ली है। कांग्रेस पार्षदों का कहना है कि अब सस्ते पेयजल की लड़ाई लड़ी जाएगी। यदि भाजपा अभी राहत नहीं देती है तो इसे कांग्रेस अपने घोषणापत्र में भी शामिल कर सकती है।
शहर में 35 हजार उपभोक्ता
शिमला शहर में पेयजल के 35 हजार उपभोक्ता हैं। इनमें 25 हजार घरेलू जबकि 10 हजार व्यावसायिक एवं निर्माण कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ता शामिल हैं।
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