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एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ रहे कांग्रेसी
सुरेश शांडिल्य/अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 23 May 2014 11:24 AM IST
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लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद हिमाचल कांग्रेस के भीतर हलचल मची है। मोदी लहर का असर स्वीकारने के बावजूद कांग्रेसी एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़ने लगे हैं। वीरभद्र के करीबियों का निशाना पार्टी नेतृत्व पर है, जबकि विरोधियों का सरकार पर है।
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पिछले कुछ दिन में ही लगभग आधा दर्जन नेताओं ने इस अंदरूनी लड़ाई को जगजाहिर कर दिया है। कांग्रेस में खेमेबाजी चुनाव से पहले ही साफ होने लगी थी। तब मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू का बागियों की वापसी पर अलग-अलग स्टैंड था।
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चुनावी नतीजों से पहले मुख्य संसदीय सचिव राजेश धर्माणी ने इस्तीफा देकर यह खुलासा किया कि राहुल की रैली में कांग्रेसियों के एक धडे़ ने मंच पर भाषण देने से उन्हें रोकने की कोशिश की।
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चुनाव में चारों खाने चित प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव एवं मंत्री कौल सिंह ठाकुर के करीबी कुलदीप राठौर ने भी हार का कारण कार्यकर्ताओं की अनदेखी बताकर इस अंदरूनी आग में जैसे घी डाल दिया।
हार के बाद वीरभद्र की बुलाई कैबिनेट बैठक के समय अतीत में उनसे अलग-थलग चलते रहे मंत्री जीएस बाली की बहस से यह द्वंद्व फिर उठा।
20 मई को पार्टी प्रदेशाध्यक्ष सुक्खू ने भी गवर्नेंस पर उंगली उठाकर हार का ठीकरा जिस तरह से सरकार पर फोड़ा, उससे फिर साफ हो गया कि सरकार और संगठन में समन्वय नहीं है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह तो कांग्रेस के बागियों की वापसी को हार की एक वजह बार-बार बता रहे हैं। उनके निशाने पर प्रत्यक्ष-परोक्ष में सुक्खू ही नजर आ रहे हैं।
आशा कुमारी के मंत्री नहीं बन सकने पर मुख्यमंत्री के बयान से फिर उनका आक्रोश सामने आया है। अब सीएम के खास करीबी शिमला जिला कांग्रेस के अध्यक्ष केहर सिंह खाची भी वीरवार को पार्टी प्रदेशाध्यक्ष के बयान के विपरीत वक्तव्य जारी कर इस खींचतान में कूद गए हैं।
जानकारों की मानें तो यह लड़ाई यूं ही चलती रही तो पहले से हार से मायूस सरकार और कांग्रेस पार्टी दोनों का ही नुकसान हो सकता है।