हिमाचल के कांगड़ा में अब बढ़ने लगा गिद्दों का कुनबा
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प्रदेश में वन्य जीव विभाग के प्रयासों से गिद्दों का कुनबा बढ़ना शुरू हो गया है। गिद्दों के संरक्षण को विभाग के प्रयासों का नतीजा कांगड़ा जिले में आना शुरू हो गया है। कांगड़ा में गिद्दों के होने की उम्मीद धीरे-धीरे बढ़ रही है। कांगड़ा में 48 साइटों पर गिद्दों की संख्या जानने को विभाग हर वर्ष सर्वे करता है। इस वर्ष के सर्वे की रिपोर्ट विभाग के पास पहुंच गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस बार गिद्दों के अधिक घोंसले मिले हैं।
पिछले साल के सर्वे में विभाग की टीम को गिद्दों के 356 घोंसलों में कुल 313 चूजे मिले थे। इस वर्ष सर्वे में आंकड़ा बढ़ गया है। सर्वे टीम को गिद्दों के 387 घोंसले मिले हैं जिनमें 352 चूजे पाए गए। पर्यावरण की दृष्टि से भी यह अच्छा संकेत है। विभाग ने ऊना, बिलासपुर और हमीरपुर में गिद्दों की संख्या जानने को सर्वे किया था। तीनों जिलों में गिद्द 99 फीसदी कम पाए गए थे। ऊना और बिलासपुर में तो एक भी घोंसला नहीं मिला जबकि हमीरपुर में गिद्दों का एक घोंसला मिला था। सूबे के कांगड़ा जिले में गिद्दों के होने की उम्मीद बची है।
इसे बचाए रखने को विभाग ने फीडिंग स्टेशन भी बनाए हैं। गिद्द किसी और जगह पलायन तो नहीं कर रहे, यह जानने के लिए विभाग ने गिद्दों में ट्रांसमीटर भी लगाए हैं। वन्य जीव विभाग मंडल हमीरपुर के डीएफओ कृष्ण कुमार ने कहा कि इस बार कांगड़ा के विभिन्न क्षेत्रों में गिद्दों के 387 घोंसले मिले हैं। घोंसलों में 352 चूजे मिले हैं। यह नतीजे उत्साहजनक हैं।
इस वर्ष गिद्दों के 387 घोंसले और 352 चूजे मिले हैं। इससे पूर्व वर्ष में 356 घोंसले मिले और 313 चूजे मिले थे। 2017 में गिद्दों के 337 घोंसले और 294 चूजे, 2016 में 307 घोंसले और 280 चूजे, 2015 में गिद्दों के 288 घोंसले और 269 चूजे मिले थे।
दुधारू पशुओं में दूध की क्षमता को बढ़ाने के लिए लगाए जाने वाले इंजेक्शन का गिद्दों पर विपरीत असर पड़ रहा था। जानवर के मरने के बाद गिद्द जब उन्हें खाते तो उस दवा का विपरीत असर उन पर पड़ता है। इससे गिद्दों की मौत हो रही थी। इसी कारण गिद्दों की संख्या घटने लगी।