दस माह के अल्प कार्यकाल वाली सरकार को लेकर क्या बोले वीरभद्र सिंह
एक ओर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सुक्खू जयराम सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल पर चार्जशीट बनाने की तैयारी कर रहे हैं, दूसरी ओर वीरभद्र सिंह कह रहे हैं कि 10 महीने के अल्प कार्यकाल को सफलता और असफलता का आधार नहीं मानना चाहिए। नए सीएम को समय मिलना चाहिए। धर्मशाला में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से लोकसभा चुनाव समेत कई मसलों पर संवाददाता सुनील चड्ढा ने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके कुछ अंश:
प्रश्न : क्या आप चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव आपके नेतृत्व में लड़ा जाए।
उत्तर : लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए मुझसे जो हो पाएगा, वह करूंगा, लेकिन लोस चुनाव में पार्टी के नेतृत्व के लिए अब काफी लोग तजुर्बेकार हो गए हैं। नेतृत्व के लिए अब मैं नए चेहरों को मौका देने के पक्ष में हूं।
प्रश्न : आप लोस चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहते। क्या आपकी उम्र साथ नहीं दे रही या आप हाईकमान से खफा हैं।
उत्तर : मैं अब लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहता। अब नए लोगों को भी मौका मिलना चाहिए। लोस चुनाव में पार्टी जिस भी उम्मीदवार को उतारेगी, उसको जिताएंगे। अभी भी मैं पूरे जोश में हूं। मुझमें काम करने की क्षमता है। मैं रिटायरमेंट नहीं लेना चाहता। मैं काफी अरसे तक सत्ता में रहा हूं। सोचता हूं कि अब नए लोगों को मौका मिलना चाहिए।
प्रश्न : आप हर मंच से अपनी ही पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष की खिलाफत क्यों कर रहे हैं।
उत्तर : पीसीसी उतना बेहतर काम नहीं कर रही, जिससे पार्टी को फायदा हो, यह बात मैं एक बार नहीं हजार बार कहूंगा। मैं सुक्खू को हटाने की मांग नहीं कर रहा। उनको पार्टी अध्यक्ष के तौर पर 4 से 5 साल हो गए हैं। इस कार्यकाल में उन्होंने संगठन की बेहतरी के लिए कोई बड़ा करिश्मा नहीं किया, जिससे लगे कि वह पार्टी को मजबूत कर पाए या उसका कद बढ़ा सके। लोस चुनाव से पहले प्रदेशाध्यक्ष का चेहरा बदलना बेहद जरूरी है। सुक्खू ने अपने कार्यकाल में सिर्फ मनमानी की है।
प्रश्न : विधानसभा के शीत सत्र में जयराम सरकार के खिलाफ विपक्ष का क्या रुख रहेगा।
उत्तर : विस सत्र में कांग्रेस का रवैया हमेशा सकारात्मक रहा है। 10 महीने के अल्प कार्यकाल के तौर पर जयराम सरकार की सफलता और असफलता का आकलन करना सही नहीं होगा। जयराम काफी संघर्ष से सीएम बने हैं। शीत सत्र में नए मुख्यमंत्री को पूरा मौका दिया जाएगा। वैसे भी नए मुख्यमंत्री अपने ही मंत्रियों की अति महत्वाकांक्षा के कारण मुश्किल में हैं। उनके मंत्री आपस में लड़ रहे हैं। इसलिए, सीएम अपनी पार्टी के अंदर ज्यादा कंफरटेबल नहीं हैं। कई वरिष्ठ लोग उनके पांव खींचने का काम करते रहते हैं।
प्रश्न : आईएएस अधिकारी पी मित्रा के मामले की विजिलेंस जांच में देरी हो रही है, क्या कहेंगे।
उत्तर : पी मित्रा अच्छे अफसर हैं। वह मेरे मुख्य सचिव भी रह चुके हैं। दरअसल, यह अफसरों के बीच लड़ाई का मामला है। पी मित्रा की कुर्सी एक अफसर हथियाना चाहता है, इसलिए यह सारा घटनाक्रम हो रहा है।
प्रश्न : एचपीसीए मामले में सुप्रीमकोर्ट का फैसला आपके पक्ष में नहीं आया। इस पर क्या कहेंगे।
उत्तर : सुप्रीमकोर्ट से पहले हमें इंसाफ नहीं मिला था। पुनर्विचार याचिका में इंसाफ मिला है। मैं क्रिकेट के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन एचपीसीए स्टेडियम के लिए आधी रात को डिग्री कॉलेज का भवन गिराया गया। यह काम तो दिन की रोशनी में भी हो सकता था।