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Shimla News: जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हिमुडा दफ्तर पहुंचे ग्रामीण
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जमीन अधिग्रहण न करने का आग्रह
बोले, लोगों की आजीविका खेती और जमीन पर है निर्भर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाठिया देवी में नया शहर बसाने के लिए ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण करने के मामले में स्थानीय लोग शुक्रवार को हिमुडा कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एकजुट हुए लोगों ने सरकार तक उनकी बात पहुंचाने की मांग की।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष देसराज ने हिमुडा प्रबंधन के समक्ष ग्रामीणों की आपत्तियां रखीं। उन्होंने कहा कि समिति भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रही है और ग्रामीण विस्थापित होकर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। पंचायत स्तर पर जनसुनवाई और जनरल हाउस की बैठकों में ग्रामीण पहले ही अपनी आपत्तियां दर्ज करवा चुके हैं। लोगों की आजीविका खेती और जमीन पर निर्भर है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इस पर हिमुडा के सीईओ ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि विभाग किसी भी स्थिति में लोगों को विस्थापित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अभी प्रक्रिया का सिर्फ पहला चरण चल रहा है। हिमुडा के पास पहले से करीब 262 बीघा जमीन उपलब्ध है। निर्माण से होने वाले आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को लेकर सर्वे किया गया है। हिमुडा के सीईओ और सचिव सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ ने कहा कि किसी भी जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों की मर्जी के बगैर एक इंच जमीन भी नहीं ली जाएगी।
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बोले, लोगों की आजीविका खेती और जमीन पर है निर्भर
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जाठिया देवी में नया शहर बसाने के लिए ग्रामीणों की जमीन का अधिग्रहण करने के मामले में स्थानीय लोग शुक्रवार को हिमुडा कार्यालय पहुंचे और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एकजुट हुए लोगों ने सरकार तक उनकी बात पहुंचाने की मांग की।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष देसराज ने हिमुडा प्रबंधन के समक्ष ग्रामीणों की आपत्तियां रखीं। उन्होंने कहा कि समिति भूमि अधिग्रहण का विरोध कर रही है और ग्रामीण विस्थापित होकर अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। पंचायत स्तर पर जनसुनवाई और जनरल हाउस की बैठकों में ग्रामीण पहले ही अपनी आपत्तियां दर्ज करवा चुके हैं। लोगों की आजीविका खेती और जमीन पर निर्भर है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण से उनके सामने गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इस पर हिमुडा के सीईओ ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि विभाग किसी भी स्थिति में लोगों को विस्थापित नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अभी प्रक्रिया का सिर्फ पहला चरण चल रहा है। हिमुडा के पास पहले से करीब 262 बीघा जमीन उपलब्ध है। निर्माण से होने वाले आर्थिक और सामाजिक प्रभाव को लेकर सर्वे किया गया है। हिमुडा के सीईओ और सचिव सुरेंद्र कुमार वशिष्ठ ने कहा कि किसी भी जमीन का जबरन अधिग्रहण नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों की मर्जी के बगैर एक इंच जमीन भी नहीं ली जाएगी।
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