यहां आज तक नहीं पहुंची सड़क, डंडों पर बांधकर अस्पताल पहुंचाने पड़ रहे मरीज
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हिमाचल के इस गांव में लोग सड़क न होने से डंडों पर बांधकर मरीजों को अस्पताल पहुंचाने पर मजबूर है। हिमाचल में भले ही अरबों रुपये से तीन बड़े फोरलेन बन रहे हों, लेकिन जिला कांगड़ा के नूरपुर का 500 आबादी वाला गुजरेड़ा गांव आज तक सड़क सुविधा से नहीं जुड़ पाया है।
यहां मरीजों को चादर में लपेटकर या फिर कंबल और बांस के डंडों के सहारे रस्सी से बांधकर ले जाना पड़ता है। सड़क तक पहुंचने के लिए दो किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई है।
अगर मरीज को मुर्दों की तरह रस्सी से बांधा न गया तो वह कहीं भी गिर सकता है। इस गांव के कई लोग गंभीर अवस्था में रास्ते में ही दम तोड़ चुके हैं। मरीजों को सड़क तक लाने के लिए एक घंटे से ज्यादा का समय लग जाता है।
हालांकि, सरकार दावा करती है कि 250 आबादी वाले भी अधिकतर गांव सड़क सुविधा से जोड़ दिए हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं दिखता। मलां पंचायत के गुजरेड़ा निवासी कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से सड़क निकालने की मांग कर चुके हैं।
लेकिन, अभी तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। हालांकि, गांव के लिए सड़क का काम शुरू हुआ था, पर बीच में ही बंद हो गया है। गांव के जोगिंद्र कपूर, मनोहर लाल, राकेश कुमार, सुनील
कुमार, ओंकार चंद, रणदीप, सुरजीत, उल्का राम, ईश्वर दास, प्रीतम चंद, भीखम, जोगिंद्र कपूर, कृष्ण कुमार, हाड़ी राम, पवन कपूर, हंसराज ने कहा कि सरकार की सुविधाओं को उन्हें कोई लाभ नहीं मिल रहा है।
जल्द लेंगे फॉरेस्ट क्लीयरेंस : विधायक
नगरोटा बगवां से विधायक अरुण कुमार कूका ने कहा कि जिस क्षेत्र से सड़क निकलनी है, वहां पर वन विभाग की भूमि है। अधिकारियों को फॉरेस्ट क्लीयरेंस लेकर सड़क का निर्माण करने के निर्देश दे दिए हैं। विस क्षेत्र के और भी जो गांव सड़क सुविधा से वंचित हैं, उन्हें भी जल्द जोड़ा जाएगा।
हाल ही में बुजुर्ग की हो गई मौत
गुजरेड़ा गांव में 25 मई को एक बुजुर्ग की देर रात तबीयत बिगड़ गई। अंधेरा होने के चलते बुजुर्ग को रात को पालकी में नहीं ले जा सके। सुबह होते ही बुजुर्ग को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बीच रास्ते में ही दम तोड़ दिया।