ऐसा गांव जहां नहीं हुआ कई बच्चों का मानसिक विकास
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हिमाचल के बिलासपुर जिला की हरनोड़ा पंचायत के गांव हरनोड़ा में 11 बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हैं। एक ही गांव के इतने बच्चों का मानसिक रूप से कमजोर होना कई सवाल खड़े कर रहा है। गांव में 30 घर हैं, जिसके हिसाब से गांव में 11 बच्चों का मानसिक रूप से कमजोर होना गंभीर माना जा रहा है।
सबसे बड़ी लापरवाही तो यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास इसके आंकड़े भी हैं, लेकिन आज तक यहां आकर किसी तरह की न तो कोई जांच की और न ही लोगों को जागरूक किया गया है। गौरतलब है कि इस गांव के 25 किलोमीटर के दायरे में सीमेंट का कारखाना भी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि गांव के आसपास किसी फैक्टरी से निकलने वाले विषैले पदार्थों के कारण ऐसा हो सकता है। जो बच्चों या उनकी माताओं को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित कर रहा हो। इसके अलावा खाने में आयोडीन की कमी, जरूरी पौष्टिक तत्वों का न मिलना भी हो सकता है। लेकिन असल वजह का पता जांच के बाद ही चल पाएगा।
सभी मानसिक रूप से कमजोर बच्चे 17 साल से कम उम्र के हैं। दूसरी तरफ लोगों को मिलने वाले पानी में जरूरी मिनरल हैं या नहीं, गांव की मिट्टी में ऐसी कोई चीज तो नहीं जो बच्चों के मानसिक विकास रोक रही हो। इसके बारे में भी स्वास्थ्य विभाग ने कभी जानने की कोशिश नहीं की।
बच्चों को पढ़ाते हैं विशेष अध्यापक
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला हरनोड़ा की प्रधानाचार्य कुसुम कपूर का कहना है कि जब उन्होंने इस स्कूल में ज्वाइन किया तो तुरंत विभाग से इन बच्चों के लिए विशेष अध्यापकों की मांग की। अब इन बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष अध्यापक विद्यालय आते हैं। प्रधानाचार्य का कहना है कि उन्होंने इन बच्चों की माताओं से बात भी की लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया।
चौथी कक्षा में पढ़ने वाले शिवम के पिता प्रमोद चंद का कहना है कि उन्हें आज तक यह पता नहीं लग पाया कि उनके बेटे का मानसिक विकास क्यों नहीं हो पाया। स्वास्थ्य विभाग ने भी कभी जांच करने की जहमत नहीं उठाई है। उप प्रधान जगदीश ठाकुर व वार्ड मेंबर गंगी देवी का कहना है कि उन्हें भी इस बारे में जानकारी नहीं है।
केमिकल हो सकता है कारण
आईजीएमसी में कार्यरत न्यूरो सर्जन विशेषज्ञ डॉ. जनक राज का कहना है कि खाने या पीने की चीजों में किसी केमिकल के कारण या बच्चों को पूर्ण आयोडीन नहीं मिल पाने की वजह से ऐसा हो सकता है। पौष्टिक आहार में कमी भी वजह हो सकती है। हालांकि, सही पता तो जांच के बाद ही लग सकता है। उन्होंने कहा कि गांव के पेयजल स्रोत के आसपास अगर कोई फैक्टरी है और उससे केमिकल निकल रहा हो तो उससे भी बच्चों की सेहत पर असर पड़ सकता है।
अभी जानकारी नहीं
सीएमओ बिलासपुर वीके चौधरी का कहना है कि उन्हें अभी इस मामले की जानकारी मिली है। गांव में जल्द ही हेल्थ वर्करों की टीम को भेजा जाएगा। उनसे रिपोर्ट ली जाएगी। रिपोर्ट आने के बाद गांव में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भेजी जाएगी ताकि असल वजह का पता लग सके।