बुटेल बोले, कौन कब बन जाए मुख्यमंत्री, पता नहीं चलता
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के ठिकानों पर सीबीआई छापामारी के बाद से सूबे में सियासत गर्मा गई है। बिना इजाजत गिरफ्तारी और पूछताछ नहीं करने के हिमाचल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई के सुप्रीम कोर्ट जाने के बाद तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
इस मामले पर सुप्रीमकोर्ट में 26 अक्तूबर को सुनवाई है। इस पर सियासी पंडितों समेत सभी निगाहें टिक गई हैं। सियासी गलियारों में सुगबुगाहट के बीच अमर उजाला ने प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधानसभा अध्यक्ष बृजबिहारी लाल बुटेल से बात की। पेश हैं प्रमुख अंश।
सवाल : मुख्यमंत्री पर सीबीआई के केस को लेकर हर तरफ चर्चा है। सीएम के भविष्य के बारे में आप क्या कहेंगे?
जवाब : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह सीबीआई केस का सामना कर रहे हैं। केस से अगर वह साफ निकलते हैं तो मुख्यमंत्री पद पर कंटीन्यू करेंगे। अगर केस का फैसला विपरीत आता है तो हाईकमान और विधायक आगामी फैसला लेंगे।
सीएम पद के सवाल का दिया ये जवाब
सवाल : क्या आप भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं?
जवाब : मैने कभी भी मुख्यमंत्री बनने की इच्छा नहीं जताई, न ही कभी दावा जताया। पार्टी हाईकमान और विधायकों की सहमति से ही मुख्यमंत्री बनाया जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी प्रधानमंत्री बन गए थे। कई राज्यों में मुख्यमंत्री भी बदले गए हैं। कौन, कब मुख्यमंत्री बन जाए, कोई पता नहीं चलता।
सवाल : प्रदेश में इन दिनों बदल रहे सियासी माहौल को लेकर आप क्या सोचते हैं?
जवाब : राजनीति में अगर उथल-पुथल न हो तो राजनीति ही कैसी।
सवाल : डिनर डिप्लोमेसी को लेकर आप हर बार चर्चा में क्यों आ जाते हैं?
जवाब : डिनर और लंच में कोई राजनीति नहीं होती। सभी विधायक, मंत्री मेरे मित्र हैं। मेरे पास आकर कहते हैं कि आपने कई दिनों से खाना नहीं खिलाया तो मैं उन्हें अपने ऑफिस या घर पर बुला लेता हूं। रही बात राजनीति की तो वह कहीं भी हो सकती है।
सवाल : मुख्यमंत्री के घर पर हुई सीबीआई छापामारी पर क्या कहेंगे?
जवाब : मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के घर पर उनकी बेटी की शादी के दिन सीबीआई की छापामारी होना दुखद है। सीबीआई कार्रवाई को पहले या बाद में भी कर सकती थी। मामला अब कानूनी हो गया है। मुख्यमंत्री भी सीबीआई को पूरा सहयोग देने की बात कर रहे हैं।
भाजपा को दी ये सलाह
सवाल : 26 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई को लेकर क्या कहेंगे?
जवाब : मामला कोर्ट के विचाराधीन है। इस पर कोई भी टिप्पणी करना सही नहीं होगा।
सवाल : भाजपा का आरोप है कि कई मंत्री, विधायक उनके संपर्क में हैं?
जवाब : भाजपा को आरोप लगाने की बजाय संपर्क में आने वाले मंत्रियों और विधायकों के नाम सार्वजनिक करने चाहिए। मात्र आरोप लगाकर बयान देना गलत परंपरा है।
सवाल : आपकी राज्यपाल से बीते दिनों हुई भेंट को प्रदेश में बदलते समीकरण के तौर पर देखा जा सकता है?
जवाब : राज्यपाल आचार्य देवव्रत के पदभार ग्रहण करने के बाद मैं राजभवन नहीं जा सका था। शिष्टाचार भेंट के नाते उनसे मुलाकात करने गया था। इसे किसी और नजरिये से न देखें।
सवाल : ई विधान प्रोजेक्ट को कितना सफल मानते हैं आप?
जवाब : ई विधान एक अभियान है। इस नई प्रणाली से राज्य सरकार की करीब सालाना 15 करोड़ रुपये की बचत की गई है। कामकाज पेपर लैस हो गया है। जो पेपर इस्तेमाल किए जा रहे हैं, वह अति आवश्यक कार्यों के लिए प्रयोग हो रहे हैं। अभियान को विधानसभा क्षेत्रों तक ले जाने का लक्ष्य है।