इस अस्पताल में ग्यारह बजे तक हो रहे टेस्ट, ये है वजह
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अस्पताल में करोड़ों रुपयों की मशीनरी लगी है, लेकिन विभिन्न तरह के टेस्ट को लेकर मनमानी की जा रही है। जी हां आईजीएमसी की सरकारी लैब में प्रशासन ने सुबह आठ से साढ़े ग्यारह बजे तक टेस्ट करवाने की सुविधा दी है।
करोड़ों की मशीनरी अस्पताल में लगी है। आलम यह है कि कभी ग्यारह तो कभी साढ़े ग्यारह बजे तक ही सैंपल लिए जाते हैं। इसके बाद मरीजों को आधे घंटे तक दूसरी ओर स्थापित एसआरएल लैब में टेस्ट के लिए इंतजार करना पड़ता है।
शिमला के मुनीष, पवन, रुचिका और लक्की ने कहा कि लेट हो गए हैं। अब एसआरएल लैब में ही टेस्ट करवाने होंगे। सवाल यह है कि जब अस्पताल में पैथोलॉजी, माइक्रोबॉयोलाजी और बायोकेमिस्ट्री लैब की सुविधा है और संबंधित विभागों में सक्षम व्यक्ति और स्टाफ है, तो क्यों 24 घंटे लैब को नहीं चलाया जाता?
लैब को चलाने को लेकर पूर्व के कर्मचारी महासंघ ने भी कई बार प्रशासन से भी मांग की है। बावजूद इसके अभी तक यह सुविधा शुरू करने में प्रबंधन नाकाम रहा है। मरीजों को एसआरएल लैब में टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं ।- प्रोफेसर अशोक शर्मा, आईजीएमसी प्राचार्य
किस विभाग में कौन से होते है टेस्ट
ऐसे में विभिन्न विभागों में में होने वाले इन टेस्ट की संख्या रोजाना छह से सात हजार के करीब पहुंच जाती है। ऐसे में अगर 24 घंटे इसी तरह के टेस्ट अस्पताल में होते गए तो घाटे का रोना रो रहा महकमा इन टेस्टों की बदौलत आने वाले पैसों से महकमा अन्य कार्य भी कर सकता है।
बाहरी राज्यों में जा रहे हैं तकनीशियन
कॉलेज प्राचार्य के माध्यम से सरकार के समक्ष भी यह मामला उठाएंगे। लैबों में आधुनिक मशीनें हैं। सरकारी लैब में तीन घंटे काम किया जाता है। प्राइवेट लैब को 21 घंटे काम दिया गया है। कॉलेज प्राचार्य प्रोफेसर अशोक शर्मा ने बताया कि लैब संबंधित मामला एमएस के अधीन है। वही इस मामले में पूरी जानकारी दे सकते हैं।
जो टेस्ट एसआरएल लैब में होते हैं, वह सरकारी में भी होते हैं। इसलिए मरीजों को सस्ती दरों पर सभी टेस्ट एक छत के नीचे मिल सके। इसके लिए कर्मचारी महासंघ हर तरह के संभव प्रयास करेगा।- सुखदेव वर्मा, प्रधान, आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ।
अस्पताल में तकनीशियनों की भारी कमी है। पहले भी मामले को उठा चुके हैं। हाल ही में कुछ रिटायर भी हो चुके हैं। जिनसे काम लिया जा रहा है, उन्हें भी अच्छा मानदेय नहीं दिया जा रहा है। पर्याप्त स्टाफ न होने के कारण दिक्कत है।- हरिंद्र मेहता, पूर्व महासचिव, आईजीएमसी कर्मचारी महासंघ।