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Shimla News: पीएचडी शोधार्थियों पर निगरानी बढ़ाएगा विवि
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आरडीसी बैठकों में उपस्थिति भी जरूरी
विवि में शोध प्रगति की निगरानी कड़ी करने के संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला शोधार्थियों पर निगरानी बढ़ाने जा रहा है। विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं आतिथ्य संस्थान ने शोधार्थियों की प्री-आरडीसी और आरडीसी बैठकों में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। संस्थान ने साफ किया है कि केवल ईमेल या किसी अन्य माध्यम से दस्तावेज भेजना पर्याप्त नहीं होगा।
एक सितंबर को जारी आदेश में सभी पीएचडी शोधार्थियों को बैठकों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। शोधार्थियों को अपनी प्रगति रिपोर्ट और शोध सारांश बैठक में प्रस्तुत करना होगा। ईमेल से भेजी गई रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्देश में अनुपस्थिति को लेकर भी सख्ती दिखाई है। प्री-आरडीसी या आरडीसी बैठक से अनुपस्थित रहने वाले शोधार्थी को वैध और संतोषजनक कारण देना होगा। यानी बिना उचित कारण बैठक से अनुपस्थित रहने पर शोधार्थी से जवाब मांगा जाएगा। आरडीसी प्रक्रिया पीएचडी शोध की गुणवत्ता जांचने का महत्वपूर्ण चरण है। इसमें शोध विषय, प्रगति और आगे की दिशा पर अकादमिक स्तर पर समीक्षा होती है।
व्यक्तिगत उपस्थिति से शोधार्थी को अपने काम की स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है। इससे केवल कागजी प्रगति रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा की संभावना घटती है। विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में भी पीएचडी शोधार्थियों के लिए आरडीसी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। हालांकि जारी सूचना पर्यटन एवं आतिथ्य संस्थान से संबंधित है। इसलिए इसे अभी पूरे विश्वविद्यालय के सभी विभागों पर लागू आदेश नहीं माना जा सकता। इस आदेश से शोधार्थियों की नियमित भागीदारी और शोध प्रगति की जवाबदेही बढ़ाने का संकेत मिला है। संस्थान ने सभी संबंधित शोधार्थियों को निर्देशों को गंभीरता से लेने को कहा है।
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विवि में शोध प्रगति की निगरानी कड़ी करने के संकेत
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला शोधार्थियों पर निगरानी बढ़ाने जा रहा है। विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं आतिथ्य संस्थान ने शोधार्थियों की प्री-आरडीसी और आरडीसी बैठकों में व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर दी है। संस्थान ने साफ किया है कि केवल ईमेल या किसी अन्य माध्यम से दस्तावेज भेजना पर्याप्त नहीं होगा।
एक सितंबर को जारी आदेश में सभी पीएचडी शोधार्थियों को बैठकों में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। शोधार्थियों को अपनी प्रगति रिपोर्ट और शोध सारांश बैठक में प्रस्तुत करना होगा। ईमेल से भेजी गई रिपोर्ट को स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्देश में अनुपस्थिति को लेकर भी सख्ती दिखाई है। प्री-आरडीसी या आरडीसी बैठक से अनुपस्थित रहने वाले शोधार्थी को वैध और संतोषजनक कारण देना होगा। यानी बिना उचित कारण बैठक से अनुपस्थित रहने पर शोधार्थी से जवाब मांगा जाएगा। आरडीसी प्रक्रिया पीएचडी शोध की गुणवत्ता जांचने का महत्वपूर्ण चरण है। इसमें शोध विषय, प्रगति और आगे की दिशा पर अकादमिक स्तर पर समीक्षा होती है।
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व्यक्तिगत उपस्थिति से शोधार्थी को अपने काम की स्थिति स्पष्ट करनी पड़ती है। इससे केवल कागजी प्रगति रिपोर्ट के आधार पर समीक्षा की संभावना घटती है। विश्वविद्यालय के अन्य विभागों में भी पीएचडी शोधार्थियों के लिए आरडीसी प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। हालांकि जारी सूचना पर्यटन एवं आतिथ्य संस्थान से संबंधित है। इसलिए इसे अभी पूरे विश्वविद्यालय के सभी विभागों पर लागू आदेश नहीं माना जा सकता। इस आदेश से शोधार्थियों की नियमित भागीदारी और शोध प्रगति की जवाबदेही बढ़ाने का संकेत मिला है। संस्थान ने सभी संबंधित शोधार्थियों को निर्देशों को गंभीरता से लेने को कहा है।
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