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जेपी नड्डा का बयान, बोले-ऋण को मंजूर किए 3.96 लाख करोड़ रुपये

Thu, 05 Oct 2017 08:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 05 Oct 2017 08:59 PM IST
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union minister jp nadda statement over loan distribution

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि जब तक हम किसी नई व्यवस्था से नहीं जुड़ते हैं तब तक दिक्कत रहती है। शिफ्ट होना ही सबसे जटिल प्रक्रिया है, लेकिन नई व्यवस्था से जुड़ेंगे तभी देश आगे बढ़ेगा। नड्डा ने यह बात वीरवार को तारा हाल स्कूल में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के मुद्रा प्रचार कैंप में कही। 

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उन्होंने कहा कि किसी भी काम को दो तरह से किया जाता है, कंपलसरी या ऑप्शनल। अगर कंपलसरी होता कि भोपाल जाओ. भोपाल जाता, लेकिन आप्शन मिला तो मैंने तय किया कि भाई मैं सिर्फ शिमला जाऊंगा।
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इससे पहले नड्डा ने इन योजनाओं के लाभार्थियों को भी लोन स्वीकृति के पत्र बांटे। इसके बाद बाद उन्होंने कहा कि हम योजनाएं शुरू करने के बाद इस तरह के आयोजन कर उनकी ग्राउंड रिपोर्ट भी खुद लेते हैं ताकि लोगों तक लाभ पहुंच सके। 
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मुद्रा के अंतर्गत ऋण देने के लिए 3.96 लाख करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। जिसका 9 करोड़ से अधिक लोगों ने लाभ उठाया है। इनमें से 6 करोड़ से अधिक महिलाएं है। इसी प्रकार आज प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत आज 14.5  करोड़ लोग बीमित हैं।

उन्होंने कहा कि अगर इस योजना या केंद्र की किसी योजना से कोई परेशानी या सुझाव हो तो उन्हें उनकी ई मेल आईडी पर भेज सकते हैं। इससे पहले कार्यक्रम में पहुंचे सांसद वीरेंद्र कश्यप, विधायक सुरेश भारद्वाज ने भी प्रधानमंत्री मोदी और नड्डा के प्रयासों की सराहना की। अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने प्रदेश में चल रहे वित्तीय समावेशों की जानकारी दी।

कैशलेस से पता चलने लगा बच्चे कहा हैं

union minister jp nadda statement over loan distribution

अपने परिवार का ही उदाहरण देते हुए कहा कि कैशलेस होने का एक सबसे बड़ा फायदा यह भी है कि बच्चे अब कहां हैं। यह बैठे बैठे पता चल जाता है। वह जहां भी कार्ड स्वैप करते हैं, उनके मोबाइल पर पैसे कटने का मेसेज तो आता है।

साथ ही उन्हें यह पता चल जाता है कि वह किसी मॉल में है या किसी रेस्टोरेंट में बैठे हैं। कहा कि किसी भी नई योजना को अपनाने में समय लगता है लेकिन अपनाने पर कई तरह के फायदे होते हैं। आंकड़ों के जरिये नड्डा ने परोक्ष रूप से कैश कल्चर पर निशाना साधा।

कहा कि सवा अरब की आबादी वाले भारत में केवल 24.4 लाख करदाता है और 47,417 ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपनी सालाना आय एक करोड़ से अधिक बताई है। नौकरी पेशा तो अपनी सैलरी बता देते हैं लेकिन जो नौकरी नहीं करते वह अपनी आय नहीं बताते।

बैंकर्स की जमकर की तारीफ
नड्डा ने कहा कि हमारी योजनाओं की वजह से बैंक वालों को खासी परेशानी हुई है। चाहे नोटबंदी से पहले रहा हो या फिर उसके बाद, या फिर जितनी भी योजनाएं शुरू की गई उनकी वजह से बैंकों पर काम का बोझ बढ़ा है। लेकिन यह बात तारीफ योग्य है कि हर बैंक कर्मचारी ने साथ खड़े होकर योजनाओं को सफल बनाने में अहम योगदान दिया।

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