बागवानों को झटका, विदेशी सेब को केंद्र ने खोले द्वार
- सभी प्रमुख बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भू-मार्गों से हो सकेगा सेब आयात
- पहले एक ही बंदरगाह से थी सेब आयात को मंजूरी, नई अधिसूचना जारी
- हिमाचल, जेएंडके, उत्तराखंड समेत पहाड़ी राज्यों के बागवानों को झटका
- सेब आयात पर भारत सरकार ने लिया यू टर्न, 10 फीसदी तक गिरेंगे रेट
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सेब आयात पर यू टर्न लेते हुए भारत सरकार ने विदेशी सेब के लिए सभी द्वार खोल दिए हैं। केंद्र के इस फैसले को हिमाचल, जेएंडके, उत्तराखंड समेत तमाम सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने बीते सितंबर माह में मुंबई की एक ही बंदरगाह से सेब के आयात को मंजूरी दी थी, लेकिन अब अन्य मार्गों पर लगाई इस पाबंदी को हटा दिया है।
संशोधित अधिसूचना जारी कर सेब आयात के लिए सभी प्रमुख बंदरगाहों, हवाई अड्डों और भू-मार्गों को खोल दिया गया है। इससे सेब उत्पादक राज्यों के बागवानों को अब मार्केट में विदेशी सेब से कड़ी प्रतिस्पर्धा मिलेगी। इससे सेब के दाम 10 फीसदी तक लुढ़क सकते हैं।
हिमाचल का सेब जुलाई माह से मार्केट में आना शुरू हो जाता है। आम लोगों के लिए राहत की बात है, लेकिन बागवानों की चिंता अभी से बढ़ने वाली हैं। केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेशी व्यापार महानिदेशक अनूप वाधवान की ओर से सितंबर महीने में अधिसूचना जारी की गई थी।
हिमाचल में सालाना सेब का 3200 करोड़ का कारोबार
इसमें पुरानी आयात नीति में संशोधन करते हुए यह तय किया गया था कि विदेशों से सेब का आयात केवल मुंबई के एक ही पोर्ट नहावा शेवा से होगा। हाल ही में इस पर विदेशी व्यापार महानिदेशालय ने फिर यू टर्न लिया है। भारत सरकार ने तय किया है कि अब कोलकाता, चेन्नई, मुंबई और कोचीन की सभी समुद्री बंदरगाहों और हवाई अड्डों के अलावा नई दिल्ली के लैंड पोर्ट और एयरपोर्ट से
भी विदेशी सेब आयात किया जा सकेगा। सभी सड़क मार्गों से भी सेब भारत आ सकेगा। एचपीएमसी उपाध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने कहा कि हिमाचल में सालाना सेब का 3200 करोड़ का कारोबार होता है। इससे लाखों लोग जुड़े हैं। केंद्र के फैसले से उन्हें नुकसान होगा।
भारत में सबसे ज्यादा तीन देशों से सेब का आयात होता है। सालाना कुल विदेशी सेब के आयात में से 40 फीसदी चीन से, 25 फीसदी चिली और 23 फीसदी अमेरिका से आयात होता है। इसके अलावा न्यूजीलैंड से 6 फीसदी, यूरोपीय देशों से 3 फीसदी और ईरान-अफगानिस्तान समेत कुल 45 से ज्यादा देशों से सेब आयात होता है।
एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक जेसी शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार की अधिसूचना से हिमाचल समेत पहाड़ी राज्यों के बागवानों को झटका लगा है। मुंबई के रास्ते विदेशी सेब भारत की मंडियों में 8 से 10 फीसदी अधिक लागत पर पहुंचता है। अब इतने ही फीसदी विदेशी सेब मार्केट में सस्ता मिलेगा। इससे यहां के सेब उत्पादकों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा।