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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Two yaks found alive after almost two months in minus 40 degree temperature at an altitude of 4,500 meters

Lahul: 4,500 मीटर की ऊंचाई पर माइनस 40 डिग्री तापमान में दो माह बाद जिंदा मिले दो याक

Fri, 17 Mar 2023 10:20 AM IST
Krishan Singh दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग/उदयपुर (लाहौल- स्पीति)
दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, केलांग/उदयपुर (लाहौल- स्पीति) Published by: Krishan Singh Updated Fri, 17 Mar 2023 10:20 AM IST
सार

बारालाचा-चंद्रताल के बीच टोगपो योंगमा में दो याक बैक कंट्री स्नो टूरिंग अभियान पर गई टीम के चार सदस्यों को 4,500 मीटर की ऊंचाई पर जीवित मिले हैं। 

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Two yaks found alive after almost two months in minus 40 degree temperature at an altitude of 4,500 meters
40 डिग्री तापमान में जिंदा मिले दो याक। - फोटो : संवाद

विस्तार

बारालाचा-चंद्रताल के बीच टोगपो योंगमा में दो याक बैक कंट्री स्नो टूरिंग अभियान पर गई टीम के चार सदस्यों को 4,500 मीटर की ऊंचाई पर जीवित मिले हैं। बताया जा रहा है कि यह याक बर्फ के बीच करीब दो माह बाद जीवित मिले हैं। यहां चारों तरफ बर्फ से ढ़की पहाड़ियों के बीच सर्दी में तापमान माइनस 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक रहता है। घाटी में नौ जनवरी 2023 को बर्फबारी हुई थी। इसके बाद लगातार बर्फबारी का दौर जारी रहा। यह दोनों जीवित याक स्पीति घाटी के लोसर गांव के बताए जा रहे हैं। इन्हें बीते वर्ष अप्रैल में बिजाई करने के बाद मई में जंगल में चरागाह के लिए छोड़ा गया था।

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बता दें कि जनजातीय क्षेत्र स्पीति घाटी के लोग आज भी बिजाई और गलीचे के निर्माण के लिए याक पालते हैं। क्षेत्र के ग्रामीण बताते हैं कि बिजाई के बाद याक को जंगल में छोड़ दिया जाता है और दिसंबर में मौसम को देखते हुए याक को जंगल से वापस लाया जाता है। कुछ याक खुद वापस आ जाते हैं। नौ जनवरी को घाटी में पहली बर्फबारी हुई थी। लोसर गांव के वीर वैद्य ने बताया कि दिसंबर 2022 को लोसर गांव के लोगों के जंगल में छोड़े 10 याक वापस नहीं आए थे। पिछले सप्ताह लाहौल से चार युवक बेक कंट्री स्नो टूरिंग अभियान के तहत बर्फीली पहाड़ियों को फतह करने गए थे। इस दौरान टोगपो योंगमा में यह दोनों याक जीवित मिले। उन्होंने इसकी सूचना लोसर के ग्रामीणों को दी है। सोनम जांगपो ने बताया कि यह दोनों याक साउथ फेस छोर पर हैं। यहां पर पहाड़ ढलानदार होने से बर्फ हवा चलने से निकल रही है। ऐसे में इस जगह पर दोनों याक जीवित रहे।

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