मत्स्य विभाग ने पहली बार किया प्रयोग, गर्म इलाके में पनपी रेनबो ट्राउट मछली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बर्फीले पानी में पनपने वाली ट्राउट मछली का अनोखा प्रयोग सफल रहा है। गोबिंदसागर जलाशय में पायलट प्रोजेक्ट के तहत मत्स्य पालन विभाग की ओर से डाला गया रेनबो ट्राउट का बीज मछली के टेबल साइज तक विकसित हो गया है।
हालांकि, गर्म जलवायु वाले इलाके में मछली के आकार तक पहुंचने वाले बीज की संख्या कुछ कम रही है। बावजूद इसके विभाग इसे बड़ी सफलता मान रहा है। प्रदेश में इस तरह का यह पहला प्रयोग है, जिसके नतीजों से विभागीय अमला खासा उत्साहित है। मत्स्य पालन विभाग के निदेशक एवं प्रारक्षी सतपाल मेहता ने बताया कि गोबिंदसागर जलाशय में भाखड़ा स्थान पर स्थापित पिंजरे स्थापित किए गए थे।
विभागीय ट्राउट फार्म धमवाड़ी जिला शिमला से रेनबो ट्राउट मछली के 500 बच्चे 10 जनवरी को प्रयोग के तौर पर इन पिंजरों में डाले गए। इस प्रयोग से यह जांचने की कोशिश की गई कि 18 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में पनपने वाली अति संवेदनशील मछली क्या हिमाचल के गर्म इलाकों में भी जीवित रह सकती है।
विभाग ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत 10 जनवरी को इन पिंजरों में ट्राउट के 500 बच्चे डाले, जिनमें 185 मछलियां 30 अप्रैल तक 250 से 300 ग्राम वजन तक विकसित हो गईं। शेष मछलियां नहीं बच सकीं।
250 से 300 ग्राम वजन का आकार टेबल साइज कहलाता है, जिसे बेचने के मुफीद माना जाता है। मेहता के मुताबिक विभाग अब इस पर और शोध कर सफलता का प्रतिशत बढ़ाने का प्रयास करेगा। भाखड़ा में जो ट्राउट मछलियां तैयार हुई हैं, उन्हें 450 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा।