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Shimla News: खतरा बने पेड़ नहीं कटे, बरसात में ढहा सकते हैं कहर
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खास खबर...
छह महीने में पेड़ काटने के लिए आए हैं 807 आवेदन, ट्री कमेटी के दौरे न होने से बढ़ी परेशानी
नगर निगम और वन विभाग के चक्कर काट रहे लोग
शिमला ग्रामीण से 472, शहरी क्षेत्र से 335आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही शहरवासियों को खतरनाक पेड़ों का डर सताने लगा है। घरों पर खतरा बनकर मंडरा रहे पेड़ों को कटाने के लिए लोग नगर निगम से लेकर वन विभाग तक के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन ट्री कमेटी के दौरे न होने से इन्हें काटने की मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
शहर में छह माह के भीतर ही नगर निगम और वन विभाग के पास खतरनाक पेड़ों को कटाने के लिए 807 आवेदन पहुंच चुके हैं। इनमें शिमला ग्रामीण से 472 तो शिमला शहरी क्षेत्र से 335 आवेदन आए हैं। यह आवेदन पेड़ों की शाखाएं हटाने से लेकर पेड़ कटाने तक के हैं। इनमें से सैकड़ों आवेदन तो पिछले साल नवंबर और दिसंबर के हैं जिनमें लोगों को अभी तक पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली है। लोगों से लेकर पार्षद तक अब नगर निगम दफ्तर में आकर पूछ रहे हैं कि आखिर कब इन्हें काटने की अनुमति मिलेगी।
सदन में भी पार्षदों ने इस पर सवाल उठाए थे। नाभा की पार्षद सिमी नंदा के अनुसार उनके वार्ड में दर्जनों पेड़ लोगों के घरों पर खतरा बनकर मंडरा रहे हैं। एक साल पहले इन्हें काटने के आवेदन लोगों ने दिए हैं, लेकिन अभी तक इनका निरीक्षण तक नहीं किया गया। आखिर लोगों को कब इनसे राहत मिलेगी। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि इसी हफ्ते से शहर में ट्री कमेटी के दौरे शुरू होंगे। लोगों को खतरनाक पेड़ों से जल्द राहत दिलाई जाएगी।
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प्रक्रिया लंबी, बरसात से पहले राहत की उम्मीद कम
शहर में खतरनाक पेड़ों को काटने के आवेदन नगर निगम और वन विभाग के पास आते हैं। इन आवेदनों के बाद महापौर की अध्यक्षता वाली ट्री अथाॅरिटी कमेटी मौके पर जाकर इनका निरीक्षण करती है। कमेटी में मेयर के अलावा वन विभाग के डीएफओ, एक सदस्य पार्षद, संयुक्त आयुक्त और उद्यान विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। यदि कमेटी को लगता है कि पेड़ खतरनाक हैं तो इसे काटने की सिफारिश की जाती है। इसकी रिपोर्ट सरकार की गठित सब कमेटी को जाती है जो अंतिम मंजूरी देती है। हालांकि इस प्रक्रिया में 15 दिन से लेकर तीन महीने तक लग सकते हैं। ऐसे में लोगों को इस बार बरसात से पहले राहत की उम्मीद कम है।
वर्ष 2023 में शहर में तबाही मचा चुके पेड़
शिमला शहर में साल 2023 में भारी बारिश के दौरान 1500 से ज्यादा देवदार के पेड़ ढह गए थे। कई जगह इन पेड़ों से घरों, गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा था। हालांकि सभी आवेदन खतरनाक पेड़ों के नहीं होते हैं। सैकड़ों आवेदन निरीक्षण के बाद फर्जी भी निकलते हैं। लोग प्लॉट खाली करने के लिए भी पेड़ काटने के लिए आवेदन करते हैं। कुछ लोग घरों पर धूप न रुके इसके लिए भी पेड़ों की शाखाएं कटवाते हैं। इससे शहर में ग्रीन एरिया भी कम हो रहा है।
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छह महीने में पेड़ काटने के लिए आए हैं 807 आवेदन, ट्री कमेटी के दौरे न होने से बढ़ी परेशानी
नगर निगम और वन विभाग के चक्कर काट रहे लोग
शिमला ग्रामीण से 472, शहरी क्षेत्र से 335आवेदन
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। बरसात का मौसम शुरू होने से पहले ही शहरवासियों को खतरनाक पेड़ों का डर सताने लगा है। घरों पर खतरा बनकर मंडरा रहे पेड़ों को कटाने के लिए लोग नगर निगम से लेकर वन विभाग तक के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन ट्री कमेटी के दौरे न होने से इन्हें काटने की मंजूरी नहीं मिल पा रही है।
शहर में छह माह के भीतर ही नगर निगम और वन विभाग के पास खतरनाक पेड़ों को कटाने के लिए 807 आवेदन पहुंच चुके हैं। इनमें शिमला ग्रामीण से 472 तो शिमला शहरी क्षेत्र से 335 आवेदन आए हैं। यह आवेदन पेड़ों की शाखाएं हटाने से लेकर पेड़ कटाने तक के हैं। इनमें से सैकड़ों आवेदन तो पिछले साल नवंबर और दिसंबर के हैं जिनमें लोगों को अभी तक पेड़ काटने की अनुमति नहीं मिली है। लोगों से लेकर पार्षद तक अब नगर निगम दफ्तर में आकर पूछ रहे हैं कि आखिर कब इन्हें काटने की अनुमति मिलेगी।
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सदन में भी पार्षदों ने इस पर सवाल उठाए थे। नाभा की पार्षद सिमी नंदा के अनुसार उनके वार्ड में दर्जनों पेड़ लोगों के घरों पर खतरा बनकर मंडरा रहे हैं। एक साल पहले इन्हें काटने के आवेदन लोगों ने दिए हैं, लेकिन अभी तक इनका निरीक्षण तक नहीं किया गया। आखिर लोगों को कब इनसे राहत मिलेगी। महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि इसी हफ्ते से शहर में ट्री कमेटी के दौरे शुरू होंगे। लोगों को खतरनाक पेड़ों से जल्द राहत दिलाई जाएगी।
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प्रक्रिया लंबी, बरसात से पहले राहत की उम्मीद कम
शहर में खतरनाक पेड़ों को काटने के आवेदन नगर निगम और वन विभाग के पास आते हैं। इन आवेदनों के बाद महापौर की अध्यक्षता वाली ट्री अथाॅरिटी कमेटी मौके पर जाकर इनका निरीक्षण करती है। कमेटी में मेयर के अलावा वन विभाग के डीएफओ, एक सदस्य पार्षद, संयुक्त आयुक्त और उद्यान विभाग के अधिकारी शामिल होते हैं। यदि कमेटी को लगता है कि पेड़ खतरनाक हैं तो इसे काटने की सिफारिश की जाती है। इसकी रिपोर्ट सरकार की गठित सब कमेटी को जाती है जो अंतिम मंजूरी देती है। हालांकि इस प्रक्रिया में 15 दिन से लेकर तीन महीने तक लग सकते हैं। ऐसे में लोगों को इस बार बरसात से पहले राहत की उम्मीद कम है।
वर्ष 2023 में शहर में तबाही मचा चुके पेड़
शिमला शहर में साल 2023 में भारी बारिश के दौरान 1500 से ज्यादा देवदार के पेड़ ढह गए थे। कई जगह इन पेड़ों से घरों, गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा था। हालांकि सभी आवेदन खतरनाक पेड़ों के नहीं होते हैं। सैकड़ों आवेदन निरीक्षण के बाद फर्जी भी निकलते हैं। लोग प्लॉट खाली करने के लिए भी पेड़ काटने के लिए आवेदन करते हैं। कुछ लोग घरों पर धूप न रुके इसके लिए भी पेड़ों की शाखाएं कटवाते हैं। इससे शहर में ग्रीन एरिया भी कम हो रहा है।