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Shimla News: नई शिक्षा नीति के लिए शिक्षकों, कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू

Fri, 01 May 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 01 May 2026 11:59 PM IST
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Training of teachers and employees started for new education policy
एचपीयू में एनईपी के तहत कर्मचारियों की अकादमिक और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर
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अभी चल रहा है 24 दिन का फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में नई शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। यूजीसी-मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की शुरुआत की गई है, जिनमें फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम, रिफ्रेशर कोर्स और शॉर्ट टर्म स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम शामिल हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार एनईपी के तहत शिक्षण पद्धति, शोध उन्मुखता, डिजिटल शिक्षा और मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण अनिवार्य किया जा रहा है। 24 दिन का फैकल्टी इंडक्शन प्रोग्राम पहले चरण में शुरू हो चुका है जिसमें उन सहायक प्राध्यापकों को शामिल किया है जिन्होंने अभी तक ओरिएंटेशन या इंडक्शन प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है। इसके अलावा शिक्षकों के लिए दो सप्ताह के रिफ्रेशर कोर्स भी आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन, पब्लिक पॉलिसी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ओपन एजुकेशनल रिसोर्सेज जैसे विषयों को शामिल किया है। इन कोर्सों के माध्यम से शिक्षकों को नई शिक्षा नीति के अनुरूप पाठ्यक्रम विकास, तकनीकी उपयोग और शोध आधारित शिक्षण के लिए तैयार किया जा रहा है।
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एनईपी के तहत केवल शिक्षकों को ही नहीं बल्कि विश्वविद्यालय के गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए भी क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। इन कार्यक्रमों में प्रशासनिक दक्षता, डिजिटल कार्यप्रणाली, संचार कौशल और प्रोफेशनल डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही एक सप्ताह के शॉर्ट टर्म कार्यक्रमों के माध्यम से जेंडर सेंसिटाइजेशन, स्ट्रेस मैनेजमेंट, मीडिया स्टडीज, सॉफ्ट स्किल्स और मानवाधिकार जैसे विषयों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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ऑनलाइन होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
डीन ऑफ स्टडीज बीके शिवराम ने कहा कि सभी प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑनलाइन, ऑफलाइन और हाइब्रिड मोड में आयोजित किए जा रहे हैं। इनके लिए आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पहल एनईपी के लक्ष्यों को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है जिससे शिक्षण गुणवत्ता और संस्थागत दक्षता में सुधार होगा।
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