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तिलक के विचार आज भी राष्ट्र को दिशा देने में है सक्षम : प्रो. हिमांशु

Tue, 28 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 11:59 PM IST
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Tilak's ideas are still capable of guiding the nation: Prof. Himanshu
एडवांस्ड स्टडी में तिलक के विचारों पर संगोष्ठी शुरू
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संगोष्ठी में देश और विदेश से आए विद्वान पढ़ेंगे शोध पत्र
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। आजादी के आंदोलन के प्रमुख नायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के विचारों को आज के भारत के संदर्भ में समझने के लिए भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (एडवांस्ड स्टडी) में मंगलवार से अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी शुरू हुई। देश और विदेश के विश्वविद्यालयों से आए विद्वान तिलक के राष्ट्रवाद, सांस्कृतिक चेतना, स्वराज, कर्मयोग और भारतीय ज्ञान परंपरा पर अपने शोध प्रस्तुत कर रहे हैं।


संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि तिलक के विचार आज भी राष्ट्र को दिशा देने की क्षमता रखते हैं। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. आरसी सिन्हा ने कहा कि गीता रहस्य के माध्यम से तिलक ने कर्मयोग को जनआंदोलन की वैचारिक शक्ति बनाया। उद्घाटन सत्र में प्रो. कुलदीप चंद्र अग्निहोत्री ने कहा कि तिलक के लिए स्वराज केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक आत्मनिर्भरता का भी आधार था। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान की अध्यक्षा प्रो. शशि प्रभा कुमार ने की। पहले दिन आयोजित तकनीकी सत्रों में लीबिया, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, सिक्किम विश्वविद्यालय, गोरखपुर विश्वविद्यालय, महाराजा सयाजीराव विवि और आईआईएएस के विद्वानों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। चर्चाओं में तिलक के प्रसिद्ध उद्घोष स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है, गीता रहस्य, स्वदेशी आंदोलन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के आधुनिक भारत में महत्व पर विशेष जोर दिया गया।
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