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Shimla News: जिले में हजारों किसान सरकारी योजनाओं के लाभ से हो सकते हैं वंचित
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खास खबर
एग्रीस्टैक में शिमला के आधे से ज्यादा किसानों ने नहीं करवाया है पंजीकरण, पंजीकृत किसानों को ही मिलेगी किसान सम्मान निधि
प्राकृतिक खेती, फसल बीमा का भी पंजीकरण पर मिलेगा लाभ
अनिल पंवार
शिमला। जिले में हजारों किसान केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं। विभाग की एग्रीस्टैक परियोजना में पंजीकरण को लेकर किसानों की कम रुचि इसका कारण बन सकती है।
जिले में करीब 1.29 लाख किसान पंजीकृत हैं, जबकि एग्रीस्टैक परियोजना में अभी तक महज करीब 63 हजार किसानों ने ही पंजीकरण करवाया है। चिंता का विषय यह है कि जिले में पंजीकरण शुरू हुए ढाई माह से अधिक का समय हो चुका है। विभाग के अनुसार जिले में केंद्र सरकार की आत्मा योजना के तहत एग्रीस्टैक परियोजना में किसानों के पंजीकरण का कार्य चल रहा है। इसके तहत किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पात्र किसानों तक केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करना है।
विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान समय में 1,01,147 किसान, केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा केंद्र और प्रदेश सरकार की फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती समेत कई अन्य योजनाएं भी चल रही हैं। विभाग के अनुसार एग्रीस्टैक के तहत मिलने वाली डिजिटल आईडी भविष्य में किसानों की पहचान होगी। अधिकारियों के अनुसार जून में पंजीकरण शुरू हुआ है।
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विभाग की ओर से विभिन्न ब्लॉकों में संगोष्ठियां आयोजित करने के साथ ही फसल सर्वे के दौरान खेतों में जाकर किसानों को पंजीकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है। एग्रीस्टैक में पंजीकृत किसानों को ही इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। विभाग ने किसानों से समय पर पंजीकरण करवाने की अपील की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसान नजदीकी विभागीय केंद्र या लोकमित्र केंद्र में जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं।
कोट
सरकार की एग्रीस्टैक परियोजना के तहत जिले में पंजीकरण का कार्य चल रहा है। विभाग की ओर से एग्रीस्टैक परियोजना के तहत संगोष्ठियों और फसल सर्वे के दौरान किसानों को पंजीकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिले में करीब 63 हजार किसानों का पंजीकरण हो चुका है। विभाग ने 15 अक्तूबर तक पंजीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा है। किसानों से अपील है कि वे नजदीकी विभागीय केंद्र या लोकमित्र केंद्र में जाकर पंजीकरण करवाएं।
-डीसी कश्यप, निदेशक, आत्मा परियोजना शिमला
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एग्रीस्टैक में शिमला के आधे से ज्यादा किसानों ने नहीं करवाया है पंजीकरण, पंजीकृत किसानों को ही मिलेगी किसान सम्मान निधि
प्राकृतिक खेती, फसल बीमा का भी पंजीकरण पर मिलेगा लाभ
अनिल पंवार
शिमला। जिले में हजारों किसान केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के लाभ से वंचित हो सकते हैं। विभाग की एग्रीस्टैक परियोजना में पंजीकरण को लेकर किसानों की कम रुचि इसका कारण बन सकती है।
जिले में करीब 1.29 लाख किसान पंजीकृत हैं, जबकि एग्रीस्टैक परियोजना में अभी तक महज करीब 63 हजार किसानों ने ही पंजीकरण करवाया है। चिंता का विषय यह है कि जिले में पंजीकरण शुरू हुए ढाई माह से अधिक का समय हो चुका है। विभाग के अनुसार जिले में केंद्र सरकार की आत्मा योजना के तहत एग्रीस्टैक परियोजना में किसानों के पंजीकरण का कार्य चल रहा है। इसके तहत किसानों का डिजिटल पंजीकरण किया जा रहा है। इसका उद्देश्य पात्र किसानों तक केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करना है।
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विभाग के अनुसार जिले में वर्तमान समय में 1,01,147 किसान, केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा केंद्र और प्रदेश सरकार की फसल बीमा योजना, प्राकृतिक खेती समेत कई अन्य योजनाएं भी चल रही हैं। विभाग के अनुसार एग्रीस्टैक के तहत मिलने वाली डिजिटल आईडी भविष्य में किसानों की पहचान होगी। अधिकारियों के अनुसार जून में पंजीकरण शुरू हुआ है।
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विभाग की ओर से विभिन्न ब्लॉकों में संगोष्ठियां आयोजित करने के साथ ही फसल सर्वे के दौरान खेतों में जाकर किसानों को पंजीकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है। एग्रीस्टैक में पंजीकृत किसानों को ही इन योजनाओं का लाभ मिलेगा। विभाग ने किसानों से समय पर पंजीकरण करवाने की अपील की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि किसान नजदीकी विभागीय केंद्र या लोकमित्र केंद्र में जाकर पंजीकरण करवा सकते हैं।
कोट
सरकार की एग्रीस्टैक परियोजना के तहत जिले में पंजीकरण का कार्य चल रहा है। विभाग की ओर से एग्रीस्टैक परियोजना के तहत संगोष्ठियों और फसल सर्वे के दौरान किसानों को पंजीकरण के लिए जागरूक किया जा रहा है। जिले में करीब 63 हजार किसानों का पंजीकरण हो चुका है। विभाग ने 15 अक्तूबर तक पंजीकरण पूरा करने का लक्ष्य रखा है। किसानों से अपील है कि वे नजदीकी विभागीय केंद्र या लोकमित्र केंद्र में जाकर पंजीकरण करवाएं।
-डीसी कश्यप, निदेशक, आत्मा परियोजना शिमला