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Shimla News: शहर में हजारों भवन अवैध, डेढ़ सौ असुरक्षित घोषित, खतरे में जिंदगियां

Mon, 07 Sep 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 07 Sep 2026 11:59 PM IST
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Thousands of buildings in the city are illegal, 150 have been declared unsafe, and lives are at risk.
दिल्ली में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद से बढ़ी चिंता, बरसात में शहर के कई मकानों को है खतरा
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बिना नक्शे के बने हैं हजारों भवन, ज्यादातर में रह रहे लोग
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दिल्ली में पांच मंजिला इमारत ढहने की घटना के बाद राजधानी शिमला में भी खतरे की जद में आए भवनों और असुरक्षित मकानों के आसपास रह रहे लोग चिंता में हैं। बरसात के चलते इनकी परेशानी बढ़ गई है।
शहर में हजारों बहुमंजिला भवन ऐसे हैं जो बिना नक्शे के बने हैं। इनमें से 150 से ज्यादा भवन नगर निगम असुरक्षित घोषित कर चुका है। रिहायशी इलाकों के बीच खड़े इन असुरक्षित और जर्जर भवनों ने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। निगम के अनुसार असुरक्षित घोषित किए यह भवन रहने योग्य नहीं हैं और इन्हें तुरंत खाली करने के निर्देश दिए हैं। इन भवनों को गिराने के आदेश भी जारी किए जा चुके हैं, लेकिन नगर निगम के इन आदेशों पर लोगों, खासकर किरायेदारों ने ऊपरी अदालतों से स्टे ले रखा है। ऐसे में इन्हें अभी तक गिराया नहीं जा सका है। इन भवनों में अभी भी लोग रह रहे हैं। इन मकानों से अब आसपास के घरों में रहने वाले लोग भी डर के साये में जी रहे हैं। शहर में गलत तरीके से की गई खोदाई से भी इस साल कई मकान खतरे की जद में आ चुके हैं। शहर के मैहली, संजौली, कुफ्टाधार, पंथाघाटी में दर्जनों मकान गलत खोदाई के कारण दरकने की कगार पर हैं। दिल्ली की घटना के बाद अब यह लोग चिंता में हैं।
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इन इलाकों में सबसे ज्यादा जर्जर भवन
शहर के लोअर बाजार, रामबाजार, सब्जी मंडी, छोटा शिमला, कसुम्पटी, बालूगंज, संजौली और लक्कड़ बाजार में सबसे ज्यादा पुराने, जर्जर और असुरक्षित भवन हैं। इनमें कई भवन पांच से छह मंजिला तक हैं। मकान मालिकों और किरायेदारों के विवाद के चलते इन्हें खाली नहीं करवाया जा सका है।
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नियमानुसार करते हैं कार्रवाई
नगर निगम वास्तुकार राजेश शर्मा ने कहा कि असुरक्षित घोषित किए मकानों को लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। असुरक्षित घोषित होने पर मकान खाली करवाया जाता है और इसे गिराया जाता है। कई बार लोग स्टे ले लेते हैं जिसमें फिर ऊपरी अदालत के आदेश का इंतजार किया जाता है। शहर में बेसमेंट को भी खोलने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है।
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