सूचना में देरी पड़ी महंगी, अफसर को ठोंका एक हजार रुपये का मुआवजा
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हिमाचल सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को आरटीआई के तहत देरी से सूचना देना महंगा पड़ा है। इसका खामियाजा संबंधित अधिकारी को भुगतना पड़ा है। राज्य सूचना आयोग ने इस पर फैसला सुनाते हुए आदेश दिए हैं कि इस चूक के लिए जिला कल्याण अधिकारी कांगड़ा अपीलकर्ता को एक हजार रुपये का मुआवजा अदा करे।
यह निर्णय राज्य मुख्य सूचना अधिकारी नरेंद्र चौहान ने सुनाया है। जिला कांगड़ा के नगरोटा के गांव जसौर निवासी शेर सिंह की अपील पर सूचना आयोग ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि अपीलकर्ता को मुआवजा देने की एक कंप्लायेंस रिपोर्ट भी भेजी जाए। आयोग ने इसी के साथ मामले का निपटारा कर दिया।
आयोग में यह अपील इस दलील के साथ दायर की गई थी कि न तो जनसूचना अधिकारी और न ही प्रथम अपीलीय अथॉरिटी ने आरटीआई के आवेदन और अपीलों पर कार्रवाई की। आवेदक ने जनसूचना अधिकारी यानी जिला कल्याण अधिकारी से 26 फरवरी 2017 को अपने एक आवेदन से संबंधित सूचना मांगी थी।
यह आवेदन आवास योजना की सब्सिडी जारी करने से संबंधित था। विभाग की ओर से सूचना आयोग में सुनवाई के दौरान प्रथम अपीलीय अथॉरिटी संयुक्त निदेशक रॉबिन जॉर्ज और जनसूचना अधिकारी रमेश कुमार मौजूद हुए। उनकी दलीलों को रिकार्ड में लेने के बाद आयोग ने पाया कि सूचना देने में देरी हुई है और इसके लिए जिला कल्याण अधिकारी को एक हजार रुपये का मुआवजा देना होगा।