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Shimla News: दिवाली पर गाय के गोबर से बने दीयों से जगमगाएंगे घर
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स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बेच रही दीये
10 से 5 रुपये में बिक रहा एक दीया, संजौली में लगाए स्टॉल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दिवाली पर परंपराओं के साथ पर्यावरण संरक्षण की भी झलक देखने को मिल रही है। मिट्टी के दीयों के साथ गाय के गोबर से बने दीयों को भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
हिमाचल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों ने दिवाली पर विशेष रूप से यह दीये तैयार किए हैं। संजौली में समूहों की महिलाओं ने स्टॉल लगाया है जिसमें इन दीयों की खूब बिक्री हो रही है। इनका मूल्य 10 से 50 रुपये तक है। लोग गाय के गोबर को पवित्र मानते हैं, जिसकी वजह से गोबर से बने दीये और धूप की मांग अधिक है। खास बात यह है कि यह पानी से भी खराब नहीं होते न ही आसानी से टूटते हैं। साईं नाथ ग्रुप विकास खंड नालागढ़ ग्रुप की सचिव जसविंदर कौर ने बताया कि इस बार दिवाली के लिए 10 हजार दीये बनाकर तैयार किए हैं। इन्हें बिक्री के लिए करनाल, शिमला, पंचकूला और हरियाणा भेजा है। बीते वर्ष ही दीयाें की एडवांस में बुकिंग आ गई थी। इसके बाद लोगों की मांग के आधार पर दीये बनाने शुरू किए थे। इनके ग्रुप में 10 महिलाएं काम करती हैं। सभी महिलाएं दिन में दस घंटे दीये बनाने का काम करती हैं। बीते वर्ष इनके ग्रुप ने दिवाली के दौरान एक लाख रुपये के दीयों की बिक्री की थी। इसके अलावा संजौली के स्टॉल में लड्डू कैंडल, गोबर से बने हवन कप, गोबर की धूप, डिजाइनर मिट्टी के दीये, सोलिड परफ्यूम, आचार, शहद, घी, माश की बड़ी, पानी के बीच में जलने वाले फ्लोटिंग कैंडल और सीबकॉर्थ क्रीम सहित अन्य चीजें प्रदर्शित की जा रही हैं।
ऐसे बनाए जाते हैं गोबर से दीये
साईं नाथ ग्रुप विकास खंड नालागढ़ ग्रुप की सचिव जसविंदर कौर ने बताया कि गोबर से दीये बनाने के लिए पहले गोबर को सुखाया जाता है। इसके बाद इसका पाउडर बनाकर छाना जाता है। इसमें चूना, जड़ी बुटियां, नीम की पत्तियां, मैथी दाना पाउडर, इमली बीज का पाउडर, मुल्तानी मिट्टी, चिकनी मिट्टी और गोंद डालकर इन्हें मिक्स किया जाता है। इन्हें ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए रंग किया जाता है। एक दिन में 100 से 200 दीये बनाकर तैयार किए जाते हैं।
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10 से 5 रुपये में बिक रहा एक दीया, संजौली में लगाए स्टॉल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दिवाली पर परंपराओं के साथ पर्यावरण संरक्षण की भी झलक देखने को मिल रही है। मिट्टी के दीयों के साथ गाय के गोबर से बने दीयों को भी लोग खूब पसंद कर रहे हैं।
हिमाचल राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों ने दिवाली पर विशेष रूप से यह दीये तैयार किए हैं। संजौली में समूहों की महिलाओं ने स्टॉल लगाया है जिसमें इन दीयों की खूब बिक्री हो रही है। इनका मूल्य 10 से 50 रुपये तक है। लोग गाय के गोबर को पवित्र मानते हैं, जिसकी वजह से गोबर से बने दीये और धूप की मांग अधिक है। खास बात यह है कि यह पानी से भी खराब नहीं होते न ही आसानी से टूटते हैं। साईं नाथ ग्रुप विकास खंड नालागढ़ ग्रुप की सचिव जसविंदर कौर ने बताया कि इस बार दिवाली के लिए 10 हजार दीये बनाकर तैयार किए हैं। इन्हें बिक्री के लिए करनाल, शिमला, पंचकूला और हरियाणा भेजा है। बीते वर्ष ही दीयाें की एडवांस में बुकिंग आ गई थी। इसके बाद लोगों की मांग के आधार पर दीये बनाने शुरू किए थे। इनके ग्रुप में 10 महिलाएं काम करती हैं। सभी महिलाएं दिन में दस घंटे दीये बनाने का काम करती हैं। बीते वर्ष इनके ग्रुप ने दिवाली के दौरान एक लाख रुपये के दीयों की बिक्री की थी। इसके अलावा संजौली के स्टॉल में लड्डू कैंडल, गोबर से बने हवन कप, गोबर की धूप, डिजाइनर मिट्टी के दीये, सोलिड परफ्यूम, आचार, शहद, घी, माश की बड़ी, पानी के बीच में जलने वाले फ्लोटिंग कैंडल और सीबकॉर्थ क्रीम सहित अन्य चीजें प्रदर्शित की जा रही हैं।
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ऐसे बनाए जाते हैं गोबर से दीये
साईं नाथ ग्रुप विकास खंड नालागढ़ ग्रुप की सचिव जसविंदर कौर ने बताया कि गोबर से दीये बनाने के लिए पहले गोबर को सुखाया जाता है। इसके बाद इसका पाउडर बनाकर छाना जाता है। इसमें चूना, जड़ी बुटियां, नीम की पत्तियां, मैथी दाना पाउडर, इमली बीज का पाउडर, मुल्तानी मिट्टी, चिकनी मिट्टी और गोंद डालकर इन्हें मिक्स किया जाता है। इन्हें ज्यादा आकर्षक बनाने के लिए रंग किया जाता है। एक दिन में 100 से 200 दीये बनाकर तैयार किए जाते हैं।
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