सरकार के हाथ खड़े, लीज पर देंगे पर्यटन निगम के 36 होटल
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प्रदेश पर्यटन विकास निगम के घाटे में चल रहे 36 होटल, रेस्तरां और अन्य इकाइयों को सरकार लीज पर देने की तैयारी में है। सरकार ने पर्यटन निगम प्रबंधन को घाटे से उबरने के लिए कड़े फैसले लेने के आदेश दिए हैं।
इससे पहले एचपीटीडीसी ने घाटे के कारणों का पता लगाने को सभी इकाइयों का सर्वे किया है। एचपीटीडीसी की 36 इकाइयां अपना खर्च निकालने में नाकाम हो रही हैं। चंबा शहर का होटल इरावती 41 लाख के घाटे में है।
कैफे रावी व्यू चंबा को इस साल साढ़े 11 लाख का घाटा हो चुका है। होटल चंपक पांच लाख से ज्यादा घाटे में है। होटल गीतांजलि ने स्थिति सुधारी है, लेकिन पिछले दस साल से यह घाटे में है। ऊना जिले का सोमभद्रा होटल 6 लाख 48 हजार, जोगिंद्रनगर स्थित होटल ऊहल 15 लाख 81 हजार, यात्री निवास
चामुंडा 12 लाख 69 हजार, होटल हमीर भी घाटे में है। यात्री निवास चिंतपूर्णी, होटल ज्वालाजी, रोहतांग मनाल्सू 7 लाख से ज्यादा घाटे में है। कैफे राफ्ट का सालाना घाटा साढ़े नौ लाख से ऊपर है। अंगलेर बंगलो कटराईं भी घाटे में है।
किस होटल को कितना घाटा
कैफे मोनाल कुल्लू को 26 लाख से ज्यादा घाटा हो चुका है। होटल सिल्वरमून 35 लाख घाटे में है। होटल सर्वरी कुल्लू का घाटा इस साल 27 लाख से बढ़ गया है।
टूरिस्ट हट जंजैहली 4 लाख, कैफे बिलासपुर 19 लाख, होटल हिलटॉप स्वारघाट 16 लाख, लेक व्यू डेढ़ लाख, टूरिस्ट इन रिवालसर 23 लाख, कैफे शिवालिक परवाणू 14 लाख, होटल शिवालिक परवाणू 48 लाख, कैफे नाहन 10 लाख, होटल रेणुका डेढ़ लाख, होटल यमुना पांवटा साहिब 32 लाख, टूरिस्ट
इन राजगढ़ साढ़े पांच लाख, ट्रांसपोर्ट विंग एक करोड़ 60 लाख, गिरि गंगा खड़ापत्थर 11 लाख, होटल चांशल 8 लाख, बुशहर रिजेंसी 12 लाख, कैफे सतलुज रामपुर 20 लाख, भराड़ीघाट साढ़े सात लाख, आईजीएमसी कैंटीन शिमला 11 लाख, कैफे
ललित कुफरी 18 लाख तथा होटल कमलेश्वर चिंडी 15 लाख के घाटे में हैं। उधर, एचपीटीडीसी की जीएम सरला चोपड़ा ने बताया कि घाटे पर चल रहे पर्यटन विकास निगम के होटल और अन्य इकाइयों को लीज पर देने का विचार चल रहा है। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इन्हें लीज पर दिया जाएगा।