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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   There should be no transfer and retirement of teachers in the middle of the academic session.

Himachal Budget 2024: शैक्षणिक सत्र के बीच न हों शिक्षकों के तबादले और सेवानिवृत्ति

Tue, 13 Feb 2024 11:28 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 13 Feb 2024 11:28 AM IST
सार

स्कूल-कॉलेजों में गुणात्मक शिक्षा देने के लिए इन दोनों प्रक्रियाओं पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बजट भाषण में रोक लगाने की घोषणा होने की आस है। 

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There should be no transfer and retirement of teachers in the middle of the academic session.
उम्मीदों का बजट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल में शैक्षणिक सत्र के बीच में शिक्षकों के तबादले और सेवानिवृत्ति ना किए जाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। स्कूल-कॉलेजों में गुणात्मक शिक्षा देने के लिए इन दोनों प्रक्रियाओं पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के बजट भाषण में रोक लगाने की घोषणा होने की आस है।  पूरे साल तबादले और सेवानिवृत्ति की प्रक्रिया चलने से संस्थानों में पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में अभिभावकों का मत है कि इसको लेकर सरकार समय रहते कोई बड़ा फैसला ले। नया सत्र शुरू होने से पहले ही शिक्षकों के तबादले और सेवानिवृत्ति की जानी चाहिए। विश्वविद्यालयों में सेवानिवृत्ति साल में सिर्फ एक बार की जाती है। इसी तर्ज पर स्कूल और कॉलेजों में फैसला किए जाने की उम्मीद है।

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स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने के लिए शिक्षित बेरोजगार नई भर्तियों की घोषणा होने के इंतजार में हैं। स्कूलों में विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों के हजारों पद रिक्त हैं। कॉलेजों में भी असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती होने का सेट व नेट पास कर चुके युवा इंतजार कर रहे हैं। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के नामांकन कम होने के लिए शिक्षकों की कमी भी बड़ा कारण है। शिक्षा विभाग की ओर से विभिन्न स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से करवाए जाने वाले सर्वे में भी यह कारण सामने आया है। केंद्र सरकार से विभिन्न योजनाओं में फंडिंग को राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करना भी जरूरी है। 
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पूर्व सरकार के समय हिमाचल प्रदेश में देश में सबसे पहले   शिक्षा नीति को लागू करने का दावा किया गया था लेकिन नीति को गंभीरता से लागू करने में अब हिमाचल प्रदेश पिछड़ गया है। हालांकि प्रदेश सरकार ने शिक्षा नीति को लागू करने के लिए कई कमेटियों का गठन किया हुआ है, लेकिन नीति लागू करने के लिए अभी धरातल पर कोई विशेष कार्य नहीं दिख रहा है। प्रदेश सरकार को इस बाबत कार्य करना चाहिए। नीति लागू करने के लिए समय तय करना जरूरी हो गया है। अगर समय रहते नीति को लागू नहीं किया गया तो भारत सरकार की ओर से प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में दी जाने वाली विभिन्न योजनाओं की फंडिंग बंद भी हो सकती है।

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शिक्षा क्षेत्र की मजबूती के लिए यह भी हैं उम्मीदें

  • स्कूल-कॉलेजों में आधुनिक कंप्यूटर लैब और स्मार्ट रूम तो बना दिए हैं, लेकिन प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी के चलते इसका लाभ विद्यार्थियों को नहीं मिल रहा है। इसके लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने को विभाग को एक अभियान चलाना चाहिए।
  •  प्रदेश में दो-तीन किलोमीटर के दायरे में खोले गए कई स्कूलों को मर्ज कर एक क्लस्टर स्कूल बनाने की योजना को नये शैक्षणिक सत्र से लागू करना चाहिए।
  •  राजीव गांधी डे बोर्डिंग स्कूल और अटल आर्दश विद्यालयों का निर्माण जल्द पूरा कर विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधा वाले स्कूल मिलने चाहिए।
  •  बच्चों की नींव को मजबूत करने के लिए प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में बदलाव कर यहां विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
  •  कॉलेजों को नैक की मान्यता लेने के लिए सभी औपचारिकताएं समय से पूरी करने के लिए प्रभारियों को शिक्षित करना चाहिए।
  •  स्कूलों में बीते लंबे समय से कार्यरत कंप्यूटर और एसएमसी शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करते हुए सरकार को इनके लिए नीति बनानी चाहिए।

सूबे के गांवों के सरकारी स्कूलों की बदली जाए सूरत
निजी स्कूलों का मुकाबला करने के लिए सरकारी स्कूलों के प्रति अभिभावकों में विश्वास जगाने के लिए सरकार को शिक्षकों की कमी को पूरा करना चाहिए। गांवों में स्थित स्कूलों की सूरत को बदलना चाहिए। नर्सरी-केजी कक्षा को हर सरकारी स्कूल में शुरू करना चाहिए। सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की जवाबदेही को तय करने की जरूरत है। - जीवन शर्मा, सेवानिवृत्त शिक्षा उपनिदेशक

निजी संस्थानों पर नजर रखने को मजबूत हो विनियामक आयोग
प्रदेश में निजी क्षेत्र में चल रहे कॉलेजों और विश्वविद्यालयों पर नजर रखने के लिए निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग को मजबूत करना चाहिए। निजी संस्थानों की फीस, मान्यता, शिक्षकों की योग्यता सहित अन्य कार्यों की निगरानी के लिए आयोग में पर्याप्त स्टाफ होना चाहिए। आयोग को पर्याप्त शक्तियां भी दी जानी चाहिए। - सौरभ शर्मा, विद्यार्थी

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