अकेली रह गई मां सीता, रघुनाथजी चले गए
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लाखों लोगों की आस्था के प्रतीक कुल्लू घाटी के अधिष्ठाता देव भगवान रघुनाथ (त्रेता ठाकुर) की 354 वर्ष पुरानी अष्टधातु की बेशकीमती मूर्ति को चोर चुराकर ले गए।
मगर मां सीता की मूर्ति को नहीं चुरा पाए। मां सीता की मूर्ति मंदिर में श्यनकक्ष में पूरी तरह से सुरक्षित है। ऐसे में एक बार फिर कलयुगी चोरों की वजह से भगवान रघुनाथजी और मां सीता को अलग होना पड़ा है।
मां सीता की मूर्ति श्यनकक्ष में ही कपड़े से लपेटकर रखी थी। मगर इसे चोर हड़बड़ाट या जल्दबाजी में देख नहीं पाए।
तीन ईंच लंबी है भगवान रघुनाथ की मूर्ति
मां सीता की मूर्ति का आकार में छोटा होना भी इसकी एक वजह रही। जानकारी के अनुसार अष्टधातु से बनी रघुनाथजी की मूर्ति करीब तीन ईंच लंबी है जबकि मां सीता की मूर्ति आकार में इससे भी छोटी है।
सदियों से हर रोज भगवान रघुनाथजी सहित मां सीता और अन्य देवताओं की पूजा अर्चना के बाद मूर्तियों को श्यनकक्ष में कपड़े से लपेटकर रखा जाता है।
चोर मूर्ति के छोटा होने के कारण उसे देख नहीं पाए और अन्य मूर्तियां लेकर फरार हो गए। सोमवार रात को जब चोर छत को तोड़कर मंदिर के भीतर पहुंचे तो जल्दबाजी में मां सीता की मूर्ति उन्हें नहीं दिखाई दी।
हालांकि भगवान रघुनाथ की मूर्ति चोरी होने की सूचना से प्रदेश के लाखों श्रद्धालु आहत हैं। मगर मां सीता अभी भी देवभूमि के लोगों का आर्शीवाद देने के लिए रघुनाथ मंदिर में ही मौजूद हैं।