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Shimla News: पॉक्सो के मामले में पीड़िता मुकरी आरोपी को मिली नियमित जमानत
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शिमला। राजधानी के महिला पुलिस थाने में दर्ज पॉक्सो और भारतीय न्याय संहिता के एक मामले में अदालत ने आरोपी को बड़ी राहत दी है।
विशेष अदालत (पॉक्सो/रेप), शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने सुनवाई के बाद पंजाब निवासी आरोपी अरमान को नियमित जमानत दे दी है। यह फैसला मुख्य गवाह यानी पीड़िता के बयानों से मुकर जाने के आधार पर सुनाया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता और आरोपी अरमान दो वर्षों से संपर्क में थे। आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर शिमला और पंजाब स्थित अपने घर पर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब आरोपी ने शादी से इन्कार कर दिया और पीड़िता की अनदेखी करने लगा तो 25 अप्रैल 2026 को महिला पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद 26 अप्रैल को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और वह तब से नाहन केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में बंद था।
मामले की सुनवाई के दौरान 5 सितंबर 2026 को पीड़िता का बयान अदालत में दर्ज किया गया। पीड़िता ने अभियोजन पक्ष के समर्थन में कुछ नहीं कहा और पूरी तरह मुकर गई। अदालत ने पाया कि मामले में कोई अन्य स्वतंत्र गवाह नहीं है और मेडिकल, फॉरेंसिक साक्ष्य भी आरोपी को सीधे तौर पर नहीं जोड़ते हैं।
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विशेष अदालत (पॉक्सो/रेप), शिमला के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा की अदालत ने सुनवाई के बाद पंजाब निवासी आरोपी अरमान को नियमित जमानत दे दी है। यह फैसला मुख्य गवाह यानी पीड़िता के बयानों से मुकर जाने के आधार पर सुनाया गया है। अभियोजन पक्ष के अनुसार पीड़िता और आरोपी अरमान दो वर्षों से संपर्क में थे। आरोप था कि आरोपी ने शादी का झांसा देकर शिमला और पंजाब स्थित अपने घर पर पीड़िता के साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब आरोपी ने शादी से इन्कार कर दिया और पीड़िता की अनदेखी करने लगा तो 25 अप्रैल 2026 को महिला पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। इसके बाद 26 अप्रैल को आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था और वह तब से नाहन केंद्रीय जेल में न्यायिक हिरासत में बंद था।
मामले की सुनवाई के दौरान 5 सितंबर 2026 को पीड़िता का बयान अदालत में दर्ज किया गया। पीड़िता ने अभियोजन पक्ष के समर्थन में कुछ नहीं कहा और पूरी तरह मुकर गई। अदालत ने पाया कि मामले में कोई अन्य स्वतंत्र गवाह नहीं है और मेडिकल, फॉरेंसिक साक्ष्य भी आरोपी को सीधे तौर पर नहीं जोड़ते हैं।
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