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Shimla News: सरकार के बजट से विवि को 250 अनुदान की उम्मीद
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हर माह कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होते हैैं 200 करोड़, तीन सालों से मिल रहा 150 करोड़
अनुदान
कम अनुदान से वेतन और पेंशन भुगतान में होती है दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला को प्रदेश सरकार के 17 मार्च को पेश होने वाले वार्षिक बजट में वार्षिक सहायता अनुदान को 150 से 250 करोड़ किए जाने की उम्मीद है। ऐसा होने पर ही विश्वविद्यालय नए वित्त वर्ष 2025-26 में अपने कर्मचारियों के वेतन, पेंशन आदि के खर्च को पूरा कर पाएगा।
हालांकि वर्ष 2022 से लेकर अब तक विश्वविद्यालय को मिलने वाले सहायता अनुदान में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे विश्वविद्यालय को अंतिम तिमाही में अपने करीब 1700 कर्मचारियों के वेतन तक के लिए बजट की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। विश्वविद्यालय ने प्रदेश सरकार को भेजे प्रस्ताव में वार्षिक सहायता अनुदान को 250 करोड़ करने का प्रस्ताव भेजा है। यह बजट मिलने पर ही विश्वविद्यालय में गैर शिक्षकों और शिक्षकों के करीब चार सौ पदों पर नई भर्तियां कर पाएगा और कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का खर्च पूरा कर पाएगा।
हिमाचल विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन पर हर साल करीब दो सौ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। विश्वविद्यालय को प्रदेश सरकार से वेतन भुगतान जैसी देनदारियों के लिए पिछले बजट में सिर्फ 152 करोड़ ही मिले थे। विवि में 2020-21 से लेकर विज्ञापित किए गैर शिक्षकों के सैकड़ों पदों पर भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है, यह तभी आगे बढ़ पाएगी जब विवि के सहायता अनुदान में सरकार वृद्धि करेगी। राज्य विश्वविद्यालय होने और प्रदेशभर के लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहे विश्वविद्यालय को अपने रूटीन के वेतन के खर्च के लिए पूरी तरह से प्रदेश सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है।
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42 करोड़ चाहिए एरियर के भुगतान को
हिमाचल विश्वविद्यालय को 1700 शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों तथा करीब 1200 पेंशनरों को सरकार द्वारा घोषित नए पे स्केल और डीए के एरियर के भुगतान के लिए 42 करोड़ के अतिरिक्त अनुदान की आवश्यकता है। इसके लिए विवि ने अतिरिक्त अनुदान की मांग की थी जो अब तक विवि को सरकार से नहीं मिले हैं।
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अनुदान
कम अनुदान से वेतन और पेंशन भुगतान में होती है दिक्कत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला को प्रदेश सरकार के 17 मार्च को पेश होने वाले वार्षिक बजट में वार्षिक सहायता अनुदान को 150 से 250 करोड़ किए जाने की उम्मीद है। ऐसा होने पर ही विश्वविद्यालय नए वित्त वर्ष 2025-26 में अपने कर्मचारियों के वेतन, पेंशन आदि के खर्च को पूरा कर पाएगा।
हालांकि वर्ष 2022 से लेकर अब तक विश्वविद्यालय को मिलने वाले सहायता अनुदान में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। इससे विश्वविद्यालय को अंतिम तिमाही में अपने करीब 1700 कर्मचारियों के वेतन तक के लिए बजट की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है। विश्वविद्यालय ने प्रदेश सरकार को भेजे प्रस्ताव में वार्षिक सहायता अनुदान को 250 करोड़ करने का प्रस्ताव भेजा है। यह बजट मिलने पर ही विश्वविद्यालय में गैर शिक्षकों और शिक्षकों के करीब चार सौ पदों पर नई भर्तियां कर पाएगा और कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का खर्च पूरा कर पाएगा।
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हिमाचल विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के वेतन पर हर साल करीब दो सौ करोड़ रुपये खर्च होते हैं। विश्वविद्यालय को प्रदेश सरकार से वेतन भुगतान जैसी देनदारियों के लिए पिछले बजट में सिर्फ 152 करोड़ ही मिले थे। विवि में 2020-21 से लेकर विज्ञापित किए गैर शिक्षकों के सैकड़ों पदों पर भर्ती प्रक्रिया अटकी हुई है, यह तभी आगे बढ़ पाएगी जब विवि के सहायता अनुदान में सरकार वृद्धि करेगी। राज्य विश्वविद्यालय होने और प्रदेशभर के लाखों छात्रों को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहे विश्वविद्यालय को अपने रूटीन के वेतन के खर्च के लिए पूरी तरह से प्रदेश सरकार पर निर्भर रहना पड़ता है।
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42 करोड़ चाहिए एरियर के भुगतान को
हिमाचल विश्वविद्यालय को 1700 शिक्षकों और गैर शिक्षक कर्मचारियों तथा करीब 1200 पेंशनरों को सरकार द्वारा घोषित नए पे स्केल और डीए के एरियर के भुगतान के लिए 42 करोड़ के अतिरिक्त अनुदान की आवश्यकता है। इसके लिए विवि ने अतिरिक्त अनुदान की मांग की थी जो अब तक विवि को सरकार से नहीं मिले हैं।