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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   The universe is visible as soon as the door of the room is closed in Government Secondary School Kandaiwala

राजकीय माध्यमिक विद्यालय कंडईवाला: कमरे का दरवाजा बंद होते ही दिखता है ब्रह्मांड

Sun, 05 Sep 2021 11:30 AM IST
Krishan Singh हितेश शर्मा, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर)
हितेश शर्मा, अमर उजाला, नाहन (सिरमौर) Published by: Krishan Singh Updated Sun, 05 Sep 2021 11:30 AM IST
सार

नाहन के रहने वाले विज्ञान शिक्षक प्रदीप शर्मा ने स्कूल को इस तरह तैयार किया कि गेट से लेकर स्कूल की दीवारें, छतें, फर्श, रेलिंग, खिड़कियां भी बच्चों के ज्ञान में वृद्धि कर रही हैं। स्कूल में एक ऐसा कमरा भी है जिसमें सूर्य की रोशनी के बीच आसमान का पूरा नक्शा, आकाश गंगाएं और उनके नाम नजर आते हैं तो दरवाजा बंद करते ही पूरा आसमान चांद तारों में तबदील हो जाता है। 

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The universe is visible as soon as the door of the room is closed in Government Secondary School Kandaiwala
राजकीय माध्यमिक विद्यालय कंडईवाला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के राजकीय माध्यमिक विद्यालय कंडईवाला के विज्ञान शिक्षक बच्चों में ऐसे ज्ञान की जोत जगा रहे हैं, जिसे एक बार देखने के बाद कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। टीजीटी मेडिकल प्रदीप शर्मा चर्चा में आए बगैर ही अपना कार्य पूरी खामोशी से कर रहे हैं। नाहन के रहने वाले विज्ञान शिक्षक प्रदीप शर्मा ने स्कूल को इस तरह तैयार किया कि गेट से लेकर स्कूल की दीवारें, छतें, फर्श, रेलिंग, खिड़कियां भी बच्चों के ज्ञान में वृद्धि कर रही हैं। स्कूल में एक ऐसा कमरा भी है जिसमें सूर्य की रोशनी के बीच आसमान का पूरा नक्शा, आकाश गंगाएं और उनके नाम नजर आते हैं तो दरवाजा बंद करते ही पूरा आसमान चांद तारों में तबदील हो जाता है। इससे बच्चों को रात में आकाश गंगाएं और तारा समूह पहचाने में मदद मिलती है। यहां तक कि स्कूल की रैलिंग को भी इस तरह डिजाइन किया कि उससे भी बच्चों को ज्ञान मिल सके। 

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स्कूल के फर्श में भी ज्ञानवर्धक आकृतियां उकेरी गई हैं। कहीं दीवारों पर वायुमंडल बनाया गया है तो कहीं, प्रयोगशाला पात्र, सौरमंडल व ज्योमितिकल आकृतियां उकेरी गई हैं। इस स्कूल में एक तरह से बच्चों को प्रेक्टिकल ज्ञान दिया जा रहा है। प्रदीप का यह प्रयास आज भी जारी है। उन्होंने इस स्कूल में पेड डिस्पोजल प्लांट के अलावा सेंसर लगे नल और वॉशबेसन भी स्थापित किए हैं। स्कूल के प्रभारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि उनका यही प्रयास है कि बच्चों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान की जाए। स्कूल को इस तरह से तैयार किया गया है कि जहां भी बच्चे नजर डालें, उसे देख ज्ञान में वृद्घि हो। बच्चों की सोच में हर तरह से सकारात्मक दृष्टिकोण को पैदा किया जा रहा है।  उन्होंने बताया कि फर्श पर लोहे के फ्रेम में चिप्स का प्रयोग किया है। दीवारों पर सरिए को बैंड करके और सीमेंट से विज्ञान और गणित संबंधी आकृतियां बनाई हैं। 

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