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Shimla News: नृत्य में दिखी गंगा की गाथा, गेयटी में हुई सांस्कृतिक संध्या
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मंच पर 80 कलाकारों ने दी प्रस्तुति,
गंगा अवतरण से दश महाविद्या की दिखाई भव्य झलक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के बहुउद्देशीय हॉल में सोमवार को भारतीय कला, संस्कृति और शास्त्रीय परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
कला संगम शिमला ने वाईडब्ल्यूसीए शिमला के सहयोग से सेलेस्टियल रिदम भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। संगीत, नृत्य, भाव-अभिनय और नृत्य-नाटिका से सजी इस शाम ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भव्य गंगा नृत्य-नाटिका रही। इसमें गंगा के दिव्य अवतरण, भगवान शिव की जटाओं में धारण होने और धरती पर पावन प्रवाह की कथा को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने गंगा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को मंच पर जीवंत कर दिया।
वहीं, दूसरी प्रमुख प्रस्तुति ‘दश महाविद्या’ रही। इसमें आदिशक्ति के 10 दिव्य स्वरूपों की शक्ति, ऊर्जा और नारीत्व की महिमा को नृत्य के माध्यम से दर्शाया गया। मंच पर विभिन्न स्वरूपों की प्रस्तुति ने स्त्री-शक्ति के व्यापक रूप को सामने रखा। इसके अलावा कथक समेत विभिन्न शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या में रंग और विविधता भर दी। नन्हे कलाकारों से लेकर वरिष्ठ प्रतिभागियों तक सभी ने अपनी प्रस्तुतियों में लंबे अभ्यास और कला के प्रति समर्पण की झलक दिखाई। इस दौरान सात से 70 वर्ष तक की आयु के कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम का स्वागत संबोधन सेंट थॉमस स्कूल की मैनेजर और वाईडब्ल्यूसीए की पूर्व अध्यक्ष विधुप्रिया ने किया। ‘सेलेस्टियल रिदम’ की परिकल्पना, निर्देशन और कोरियोग्राफी कला संगम की अध्यक्ष पूनम शर्मा ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में केशव कश्यप और दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार उपस्थित रहे।
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गंगा अवतरण से दश महाविद्या की दिखाई भव्य झलक
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के बहुउद्देशीय हॉल में सोमवार को भारतीय कला, संस्कृति और शास्त्रीय परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
कला संगम शिमला ने वाईडब्ल्यूसीए शिमला के सहयोग से सेलेस्टियल रिदम भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया। संगीत, नृत्य, भाव-अभिनय और नृत्य-नाटिका से सजी इस शाम ने दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण भव्य गंगा नृत्य-नाटिका रही। इसमें गंगा के दिव्य अवतरण, भगवान शिव की जटाओं में धारण होने और धरती पर पावन प्रवाह की कथा को नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने गंगा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को मंच पर जीवंत कर दिया।
वहीं, दूसरी प्रमुख प्रस्तुति ‘दश महाविद्या’ रही। इसमें आदिशक्ति के 10 दिव्य स्वरूपों की शक्ति, ऊर्जा और नारीत्व की महिमा को नृत्य के माध्यम से दर्शाया गया। मंच पर विभिन्न स्वरूपों की प्रस्तुति ने स्त्री-शक्ति के व्यापक रूप को सामने रखा। इसके अलावा कथक समेत विभिन्न शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुतियों ने सांस्कृतिक संध्या में रंग और विविधता भर दी। नन्हे कलाकारों से लेकर वरिष्ठ प्रतिभागियों तक सभी ने अपनी प्रस्तुतियों में लंबे अभ्यास और कला के प्रति समर्पण की झलक दिखाई। इस दौरान सात से 70 वर्ष तक की आयु के कलाकारों ने मंच पर प्रस्तुतियां दीं।
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कार्यक्रम का स्वागत संबोधन सेंट थॉमस स्कूल की मैनेजर और वाईडब्ल्यूसीए की पूर्व अध्यक्ष विधुप्रिया ने किया। ‘सेलेस्टियल रिदम’ की परिकल्पना, निर्देशन और कोरियोग्राफी कला संगम की अध्यक्ष पूनम शर्मा ने की। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में केशव कश्यप और दिनकर स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार उपस्थित रहे।
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