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Shimla News: कोटशेरा कॉलेज में हॉस्टल बनाने के लिए चयनित की जमीन निकली कच्ची
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एक्सक्लूसिव
भूगोल विभाग और जियोलॉजिकल सर्वे की टीम ने जगह को निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया, अब करनी होगी नई जगह की तलाश
विधायक ने शिक्षा विभाग को दिए नई साइट खोजने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कोटशेरा कॉलेज चौड़ा मैदान के छात्रों को हॉस्टल सुविधा के लिए अब और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। कॉलेज परिसर के पास प्रस्तावित पांच मंजिला हॉस्टल निर्माण की परियोजना फिलहाल रद्द कर दी है। प्रस्तावित निर्माण स्थल के मिट्टी के सैंपल फेल होने के कारण सरकार ने यह फैसला लिया है।
भूगोल विभाग और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के भूवैज्ञानिकों द्वारा किए सर्वे में पाया गया कि चिह्नित स्थान की वजन वहन क्षमता तय मानकों के अनुसार पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह जमीन प्रस्तावित भवन का भार उठाने में सक्षम नहीं है, जिसके चलते निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना जोखिम भरा माना गया। कोटशेरा कॉलेज में करीब 2500 छात्र पढ़ते हैं लेकिन कॉलेज परिसर के आसपास केवल 300 छात्रों के लिए ही होस्टल की सुविधा उपलब्ध है। अधिकांश छात्रों को कॉलेज से दूर महंगे कमरों और पीजी में रहना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2021 में पहली बार पांच मंजिला होस्टल कांप्लेक्स बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये की डीपीआर भी बनाई गई थी।
अब मिट्टी के सैंपल फेल होने के बाद यह परियोजना एक बार फिर अधर में लटक गई है। स्थानीय स्तर पर भी छात्रों में इस फैसले को लेकर निराशा देखी जा रही है क्योंकि लंबे समय से हॉस्टल सुविधा की मांग उठती रही है। कई छात्र संगठनों ने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की थी लेकिन अब नई जगह की तलाश के कारण प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।
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शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा ने बताया कि रिपोर्ट में सामने आया है कि मिट्टी की वहन क्षमता उम्मीद से काफी कम है। पांच मंजिला भवन के निर्माण के लिए फाउंडेशन में 10 मीटर से अधिक गहरी खोदाई करनी पड़ेगी जो शिमला के भवन निर्माण नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि छोटे भवन का निर्माण करने पर भी अधिक संसाधन खर्च होंगे, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाएगा। अब शिक्षा विभाग, वन विभाग और राजस्व विभाग के साथ मिलकर नई उपयुक्त जगह की तलाश की जा रही है। नई साइट तय होने के बाद ही परियोजना को दोबारा शुरू किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तकनीकी बाधा के कारण काम प्रभावित न हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नई जगह सभी मानकों पर खरी उतरे और छात्रों को लंबे समय तक सुरक्षित सुविधा मिल सके।
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भूगोल विभाग और जियोलॉजिकल सर्वे की टीम ने जगह को निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया, अब करनी होगी नई जगह की तलाश
विधायक ने शिक्षा विभाग को दिए नई साइट खोजने के निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। कोटशेरा कॉलेज चौड़ा मैदान के छात्रों को हॉस्टल सुविधा के लिए अब और लंबा इंतजार करना पड़ेगा। कॉलेज परिसर के पास प्रस्तावित पांच मंजिला हॉस्टल निर्माण की परियोजना फिलहाल रद्द कर दी है। प्रस्तावित निर्माण स्थल के मिट्टी के सैंपल फेल होने के कारण सरकार ने यह फैसला लिया है।
भूगोल विभाग और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के भूवैज्ञानिकों द्वारा किए सर्वे में पाया गया कि चिह्नित स्थान की वजन वहन क्षमता तय मानकों के अनुसार पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यह जमीन प्रस्तावित भवन का भार उठाने में सक्षम नहीं है, जिसके चलते निर्माण कार्य को आगे बढ़ाना जोखिम भरा माना गया। कोटशेरा कॉलेज में करीब 2500 छात्र पढ़ते हैं लेकिन कॉलेज परिसर के आसपास केवल 300 छात्रों के लिए ही होस्टल की सुविधा उपलब्ध है। अधिकांश छात्रों को कॉलेज से दूर महंगे कमरों और पीजी में रहना पड़ता है। इस समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2021 में पहली बार पांच मंजिला होस्टल कांप्लेक्स बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये की डीपीआर भी बनाई गई थी।
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अब मिट्टी के सैंपल फेल होने के बाद यह परियोजना एक बार फिर अधर में लटक गई है। स्थानीय स्तर पर भी छात्रों में इस फैसले को लेकर निराशा देखी जा रही है क्योंकि लंबे समय से हॉस्टल सुविधा की मांग उठती रही है। कई छात्र संगठनों ने पहले भी इस मुद्दे को उठाया था और प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की थी लेकिन अब नई जगह की तलाश के कारण प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।
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शिमला शहरी विधायक हरीश जनारथा ने बताया कि रिपोर्ट में सामने आया है कि मिट्टी की वहन क्षमता उम्मीद से काफी कम है। पांच मंजिला भवन के निर्माण के लिए फाउंडेशन में 10 मीटर से अधिक गहरी खोदाई करनी पड़ेगी जो शिमला के भवन निर्माण नियमों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि छोटे भवन का निर्माण करने पर भी अधिक संसाधन खर्च होंगे, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाएगा। अब शिक्षा विभाग, वन विभाग और राजस्व विभाग के साथ मिलकर नई उपयुक्त जगह की तलाश की जा रही है। नई साइट तय होने के बाद ही परियोजना को दोबारा शुरू किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तकनीकी बाधा के कारण काम प्रभावित न हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि नई जगह सभी मानकों पर खरी उतरे और छात्रों को लंबे समय तक सुरक्षित सुविधा मिल सके।