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Shimla News: बीमा कंपनी को 3.58 लाख रुपये अदा करने का आदेश
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जिला उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
पत्नी की मौत पर दो लाख का मुआवजा भी देना होगा
रुचि सांख्यान
शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने तकनीकी और औपचारिक कागजी कमियों के आधार पर क्लेम लटकाने वाली यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने कंपनी को शिकायतकर्ता को वाहन के नुकसान की भरपाई के रूप में सर्वेयर रिपोर्ट के अनुसार आरसी प्रस्तुत करने पर 3,58,672 रुपये या आरसी के बिना 3,13,672 रुपये अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा पत्नी की मृत्यु पर देय दो लाख रुपये का पर्सनल एक्सीडेंट (पीए) कवर भी नौ प्रतिशत सालाना ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 15,000 और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये का हर्जाना भी 45 दिन के भीतर चुकाने को कहा है।
चक्कर निवासी आशीष बट्टू ने आयोग में दर्ज शिकायत में बताया कि उनकी गाड़ी का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से बीमा करवाया था। इसमें पांच अज्ञात सवारियों के लिए प्रति व्यक्ति दो लाख रुपये का अतिरिक्त पर्सनल एक्सीडेंट कवर भी शामिल था। 18 जून 2025 को उनकी गाड़ी हरियाणा में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में शिकायतकर्ता की पत्नी रंजना बट्टू और चालक रणजीत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। बीमा कंपनी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता ने 30 दिन की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही कानूनी नोटिस भेज दिया था। कंपनी के अनुसार कैंसिल चेक और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज समय पर जमा नहीं करवाए थे जिस कारण क्लेम की अंतिम प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
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आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां तकनीकी या गैर-जरूरी औपचारिकताओं के आधार पर उपभोक्ताओं के जायज क्लेम को खारिज या अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रख सकतीं। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून एक कल्याणकारी कानून है। हादसा 18 जून 2025 को हुआ था जबकि शिकायत 24 फरवरी 2026 को दर्ज की गई। ऐसे में बीमा कंपनी के पास मामले के निपटारे के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध था। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर निर्देशानुसार सभी देय राशियों का भुगतान शिकायतकर्ता को सुनिश्चित करे।
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पत्नी की मौत पर दो लाख का मुआवजा भी देना होगा
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शिमला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग शिमला ने तकनीकी और औपचारिक कागजी कमियों के आधार पर क्लेम लटकाने वाली यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी को भुगतान का आदेश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष डॉ. बलदेव सिंह और सदस्य निधि शर्मा की पीठ ने कंपनी को शिकायतकर्ता को वाहन के नुकसान की भरपाई के रूप में सर्वेयर रिपोर्ट के अनुसार आरसी प्रस्तुत करने पर 3,58,672 रुपये या आरसी के बिना 3,13,672 रुपये अदा करने का आदेश दिया है। इसके अलावा पत्नी की मृत्यु पर देय दो लाख रुपये का पर्सनल एक्सीडेंट (पीए) कवर भी नौ प्रतिशत सालाना ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 15,000 और मुकदमे के खर्च के तौर पर 10,000 रुपये का हर्जाना भी 45 दिन के भीतर चुकाने को कहा है।
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चक्कर निवासी आशीष बट्टू ने आयोग में दर्ज शिकायत में बताया कि उनकी गाड़ी का यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से बीमा करवाया था। इसमें पांच अज्ञात सवारियों के लिए प्रति व्यक्ति दो लाख रुपये का अतिरिक्त पर्सनल एक्सीडेंट कवर भी शामिल था। 18 जून 2025 को उनकी गाड़ी हरियाणा में दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस हादसे में शिकायतकर्ता की पत्नी रंजना बट्टू और चालक रणजीत सिंह की मौके पर ही मौत हो गई थी। बीमा कंपनी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता ने 30 दिन की निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही कानूनी नोटिस भेज दिया था। कंपनी के अनुसार कैंसिल चेक और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज समय पर जमा नहीं करवाए थे जिस कारण क्लेम की अंतिम प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
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आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि बीमा कंपनियां तकनीकी या गैर-जरूरी औपचारिकताओं के आधार पर उपभोक्ताओं के जायज क्लेम को खारिज या अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रख सकतीं। आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून एक कल्याणकारी कानून है। हादसा 18 जून 2025 को हुआ था जबकि शिकायत 24 फरवरी 2026 को दर्ज की गई। ऐसे में बीमा कंपनी के पास मामले के निपटारे के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध था। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर निर्देशानुसार सभी देय राशियों का भुगतान शिकायतकर्ता को सुनिश्चित करे।