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Shimla News: आज खत्म होगा काला महीना फिर शुरू होंगे मांगलिक कार्य
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सुबह 7:58 बजे सूर्य करेंगे राशि परिवर्तन
दोपहर 2:31 बजे तक रहेगा पुण्यकाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आश्विन (कन्या) संक्रांति के साथ काला महीना समाप्त हो जाएगा। कन्या राशि में सूर्य देव 17 सितंबर को प्रवेश करेंगे। सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही काला महीना समाप्त होने की मान्यता है। इसके बाद मांगलिक और शुभ कार्यों के आयोजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
गंज बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश सुबह 7:58 बजे होगा। संक्रांति का पुण्यकाल भी सुबह 7:58 से दोपहर 2:31 बजे तक रहेगा। पुण्यकाल की अवधि छह घंटे 33 मिनट होगी। वहीं महापुण्यकाल सुबह 7:58 से 10:01 बजे तक रहेगा जिसकी अवधि दो घंटे तीन मिनट है। उन्होंने बताया कि संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान और दान का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। श्रद्धालु इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं।
नदी या तीर्थ तक जाना संभव न हो तो घर पर स्नान कर सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने की परंपरा भी है। इस दिन काले तिल, अन्न, वस्त्र और गौदान करने का भी विशेष महत्व बताया है। पंडित उमेश नौटियाल के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के साथ काला महीना समाप्त माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काला महीना समाप्त होने के बाद शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त निकाले जाते हैं। ऐसे में लंबे समय से शुभ कार्यों की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों में भी तैयारियां शुरू हो जाएंगी।
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दोपहर 2:31 बजे तक रहेगा पुण्यकाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। धार्मिक परंपराओं के अनुसार आश्विन (कन्या) संक्रांति के साथ काला महीना समाप्त हो जाएगा। कन्या राशि में सूर्य देव 17 सितंबर को प्रवेश करेंगे। सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ ही काला महीना समाप्त होने की मान्यता है। इसके बाद मांगलिक और शुभ कार्यों के आयोजन का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
गंज बाजार स्थित राधाकृष्ण मंदिर के पुजारी उमेश नौटियाल ने बताया कि 17 सितंबर को सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश सुबह 7:58 बजे होगा। संक्रांति का पुण्यकाल भी सुबह 7:58 से दोपहर 2:31 बजे तक रहेगा। पुण्यकाल की अवधि छह घंटे 33 मिनट होगी। वहीं महापुण्यकाल सुबह 7:58 से 10:01 बजे तक रहेगा जिसकी अवधि दो घंटे तीन मिनट है। उन्होंने बताया कि संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान और दान का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। श्रद्धालु इस दौरान पवित्र नदियों में स्नान कर सकते हैं।
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नदी या तीर्थ तक जाना संभव न हो तो घर पर स्नान कर सूर्य देव की पूजा-अर्चना करने की परंपरा भी है। इस दिन काले तिल, अन्न, वस्त्र और गौदान करने का भी विशेष महत्व बताया है। पंडित उमेश नौटियाल के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश के साथ काला महीना समाप्त माना जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काला महीना समाप्त होने के बाद शुभ व मांगलिक कार्यों के लिए मुहूर्त निकाले जाते हैं। ऐसे में लंबे समय से शुभ कार्यों की प्रतीक्षा कर रहे परिवारों में भी तैयारियां शुरू हो जाएंगी।
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