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Shimla News: राजधानी में 19 हजार कॉलेज छात्रों के लिए सिर्फ 1880 सीटें
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खास खबर
शहर में 90 फीसदी विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों से बाहर रहने को मजबूर, दिल्ली हादसे के बाद छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने की मांग
एचपीयू में भी नौ हजार छात्रों में से महज 15 सौ को सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दिल्ली के सत्य निकेतन में भवन गिरने से देशभर के छात्रावासों की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस भवन के गिरने से सात छात्रों की मौत हो गई थी।शिमला के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के उपलब्ध आंकड़े भी छात्रावास की सीमित क्षमता की तस्वीर सामने रखते हैं।
शहर के चार प्रमुख शिक्षण संस्थानों में 19,600 से अधिक विद्यार्थी हैं, जबकि छात्रावासों में 1,880 के ठहरने की व्यवस्था है। कुल छात्र संख्या के मुकाबले छात्रावासों की क्षमता करीब दस प्रतिशत है। इन चार संस्थानों के आंकड़ों में ही छात्र संख्या और छात्रावास क्षमता के बीच बड़ा अंतर सामने आता है। संस्थानों के छात्रावासों में जगह नहीं मिलने वाले विद्यार्थियों के लिए पीजी, किराये के कमरे और साझा आवास प्रमुख विकल्प हैं। शिमला में शिक्षण संस्थानों के आसपास ऐसे निजी आवासों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं। शिमला में भी छात्र संख्या बढ़ने के साथ संस्थागत छात्रावासों की क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में छात्रों की संख्या नौ हजार के करीब है। वहीं इसके 13 छात्रावासों में करीब 1500 के ठहरने की व्यवस्था है। आरकेेएमवी में दो, संजौली कॉलेज में एक छात्रावास है। वहीं कोटशेरा कॉलेज के पास अभी एक भी छात्रावास नहीं है। छात्रावास की सीमित क्षमता के कारण बाहरी विद्यार्थियों की बड़ी आबादी निजी आवास व्यवस्था पर निर्भर है। ऐसे आवासों में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, भवन की निर्धारित क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का संस्थानवार आंकड़ा अलग से उपलब्ध नहीं है।
निजी आवासों पर निर्भर विद्यार्थियों की संख्या बड़ी
समरहिल, लॉन्गवुड, संजौली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए निजी आवास ही प्रमुख विकल्प हैं। ऐसे में किराये के कमरों और पीजी में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भवन की क्षमता, अग्निसुरक्षा, निकासी मार्ग और आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था जैसे पहलुओं पर नियमित निगरानी की जरूरत है। छात्रावास क्षमता बढ़ाना भी संस्थानों के सामने बड़ी जरूरत है। मौजूदा आंकड़ों में विद्यार्थी संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त छात्रावास व्यवस्था जरूरी है जो दूसरे जिलों से पढ़ाई के लिए शिमला आते हैं।
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बॉक्स :
शहर के शिक्षण संस्थानों की हालत
संस्थान विद्यार्थी हॉस्टलों ठहरने की क्षमता
एचपीयू 9,000 1,539
आरकेएमवी 3,700 200
कोटशेरा कॉलेज 3,400-- --
संजौली कॉलेज 3,500 141
कोट
भविष्य में छात्राें के लिए एचपीयू की हॉस्टल क्षमता बढ़ाने का प्रयास है। इसके लिए तीन नए हॉस्टलों का निर्माण किया जाएगा जिसके लिए प्रस्ताव बनाया गया है। इससे छात्रों को राहत मिलेगी।-
आरएल जिंटा, डीन ऑफ स्टडीज, एचपीयू
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शहर में 90 फीसदी विद्यार्थी शिक्षण संस्थानों से बाहर रहने को मजबूर, दिल्ली हादसे के बाद छात्रावासों की क्षमता बढ़ाने की मांग
एचपीयू में भी नौ हजार छात्रों में से महज 15 सौ को सुविधा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। दिल्ली के सत्य निकेतन में भवन गिरने से देशभर के छात्रावासों की स्थिति पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस भवन के गिरने से सात छात्रों की मौत हो गई थी।शिमला के प्रमुख शिक्षण संस्थानों के उपलब्ध आंकड़े भी छात्रावास की सीमित क्षमता की तस्वीर सामने रखते हैं।
शहर के चार प्रमुख शिक्षण संस्थानों में 19,600 से अधिक विद्यार्थी हैं, जबकि छात्रावासों में 1,880 के ठहरने की व्यवस्था है। कुल छात्र संख्या के मुकाबले छात्रावासों की क्षमता करीब दस प्रतिशत है। इन चार संस्थानों के आंकड़ों में ही छात्र संख्या और छात्रावास क्षमता के बीच बड़ा अंतर सामने आता है। संस्थानों के छात्रावासों में जगह नहीं मिलने वाले विद्यार्थियों के लिए पीजी, किराये के कमरे और साझा आवास प्रमुख विकल्प हैं। शिमला में शिक्षण संस्थानों के आसपास ऐसे निजी आवासों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रहते हैं। शिमला में भी छात्र संख्या बढ़ने के साथ संस्थागत छात्रावासों की क्षमता उसी अनुपात में नहीं बढ़ी है। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में छात्रों की संख्या नौ हजार के करीब है। वहीं इसके 13 छात्रावासों में करीब 1500 के ठहरने की व्यवस्था है। आरकेेएमवी में दो, संजौली कॉलेज में एक छात्रावास है। वहीं कोटशेरा कॉलेज के पास अभी एक भी छात्रावास नहीं है। छात्रावास की सीमित क्षमता के कारण बाहरी विद्यार्थियों की बड़ी आबादी निजी आवास व्यवस्था पर निर्भर है। ऐसे आवासों में विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, भवन की निर्धारित क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था का संस्थानवार आंकड़ा अलग से उपलब्ध नहीं है।
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निजी आवासों पर निर्भर विद्यार्थियों की संख्या बड़ी
समरहिल, लॉन्गवुड, संजौली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए निजी आवास ही प्रमुख विकल्प हैं। ऐसे में किराये के कमरों और पीजी में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण हो जाती है। भवन की क्षमता, अग्निसुरक्षा, निकासी मार्ग और आपात स्थिति में बाहर निकलने की व्यवस्था जैसे पहलुओं पर नियमित निगरानी की जरूरत है। छात्रावास क्षमता बढ़ाना भी संस्थानों के सामने बड़ी जरूरत है। मौजूदा आंकड़ों में विद्यार्थी संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। खासकर उन विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त छात्रावास व्यवस्था जरूरी है जो दूसरे जिलों से पढ़ाई के लिए शिमला आते हैं।
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शहर के शिक्षण संस्थानों की हालत
संस्थान विद्यार्थी हॉस्टलों ठहरने की क्षमता
एचपीयू 9,000 1,539
आरकेएमवी 3,700 200
कोटशेरा कॉलेज 3,400
संजौली कॉलेज 3,500 141
कोट
भविष्य में छात्राें के लिए एचपीयू की हॉस्टल क्षमता बढ़ाने का प्रयास है। इसके लिए तीन नए हॉस्टलों का निर्माण किया जाएगा जिसके लिए प्रस्ताव बनाया गया है। इससे छात्रों को राहत मिलेगी।-
आरएल जिंटा, डीन ऑफ स्टडीज, एचपीयू