Himachal: 50 लाख रुपये तक के विकास कार्यों के लिए एम फाॅर्म देने का झंझट खत्म, सरकार ने बदली प्रक्रिया
रॉयल्टी काटकर ही ठेकेदारों को पेमेंट रिलीज होगी। अभी कई ठेकेदार जुगाड़ लगाकर क्रशर संचालकों से एम फाॅर्म लेते रहे हैं। विभाग के संज्ञान में आया है कि कई ठेकेदारों ने फर्जी एम फार्म भी विभाग के पास जमा कराकर राशि अर्जित की है।
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प्रदेश सरकार ने 50 लाख तक के विकास कार्यों के लिए एम फाॅर्म का झंझट खत्म कर दिया है। अब उक्त राशि के विकास कार्यों के लिए ठेकेदारों को विभाग के पास रेता, बजरी के एम फार्म जमा नहीं कराने होंगे। जब भी ठेकेदारों को विकास कार्य आवंटित होगा, काम शुरू करने से पहले ठेकेदारों से रॉयल्टी काट दी जाएगी। रॉयल्टी काटकर ही ठेकेदारों को पेमेंट रिलीज होगी। अभी कई ठेकेदार जुगाड़ लगाकर क्रशर संचालकों से एम फाॅर्म लेते रहे हैं। विभाग के संज्ञान में आया है कि कई ठेकेदारों ने फर्जी एम फार्म भी विभाग के पास जमा कराकर राशि अर्जित की है। इसको ध्यान में रखते हुए अब सरकार 50 लाख तक के कार्यों के एम फार्म के एवज में रॉयल्टी काटेगी।
हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज विभाग, लोक निर्माण और जल शक्ति विभाग में हर साल करोड़ों के विकास कार्यों के टेंडर लगते है। इन कार्यों के लिए रेता, बजरी की जरूरत रहती है। पहले सरकार ने व्यवस्था की थी कि जब भी ठेकेदार क्रशर से रेता-बजरी उठाएगा, क्रशर माालिकों से उसे एम फाॅर्म भी देना होगा। लेकिन क्रशर मालिक पर भी जरूरत से ज्यादा एम फाॅर्म नहीं दे सकते थे। दिन में जितनी बजरी और रेता तैयार होता है, उसी हिसाब से एम फाॅर्म दिया दिया जा सकता है। ऐसे में ठेकेदारों को एम फाॅर्म नहीं मिल रहे थे। ऐसे में कई ठेकेदार फर्जी एम फाॅर्म बनाकर विभागों से अपनी पेमेंट रिलीज करा रहे थे। सरकार ने इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होगा। लोक निर्माण विभाग में काम करने वाले ठेकेदारों से पहले ही रॉयल्टी काट दी जाएगी।