सात माह में छह हजार बढ़े गुच्छी के दाम, इतने रुपये में बिक रहा किलो
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पिछले सात माह में ही औषधीय गुणों से भरपूर गुच्छी के दाम छह हजार रुपये बढ़ गए। अंतरराष्ट्रीय रामपुर लवी मेले में एक किलो गुच्छी के दाम 15000 रुपये वसूले जा रहे हैं। अप्रैल में हुए राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले में गुच्छी अधिकतम 9 हजार रुपये प्रति किलो तक बिकी थी।
दाम आसमान में होने से इसके खरीदार कम ही मिल रहे हैं। गुच्छी से बने व्यंजनों को फाइव स्टार होटलों में परोसा जाता है। इसका उपयोग कई जीवनरक्षक दवाइयां बनाने में भी किया जाता है।
ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली गुच्छी कई बीमारियों में रामबाण है। इसमें विटामिन बी, डी, सी और के की मात्रा अधिक होती है, जो दिल के मरीजों के लिए बहुत उपयोगी है। कुछ लोग इसे ताकत के लिए भी खाते हैं।
सबसे महंगी सब्जी का दर्जा
पहाड़ी क्षेत्रों में गुच्छी कई लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। हालांकि इसे ढूंढना आसान नहीं। पहाड़ों में बिजली की गड़गड़ाहट के बाद यह जमीन से प्राकृतिक तौर पर बाहर निकलती है। गुच्छी का कारोबार रोहड़ू, रामपुर, चंबा और कुल्लू में ज्यादा होता है।
लवी मेला मैदान में किन्नौरी मार्केट में दुकान सजाए पोवारी निवासी मालगिरी नेगी, रंजीत नेगी, यशवंती और संजीव ने बताया कि गुच्छी गुणकारी सब्जी है। इसलिए इसके दाम भी अधिक रहते हैं। दाम अधिक होने से लोग कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।
गुच्छी को सबसे महंगी सब्जी का दर्जा है। कुछ साल पहले तो इसके दाम 25 से 30 हजार रुपये किलो तक पहुंच चुके थे। देश में ही नहीं, विदेशों में भी इसकी खूब डिमांड रहती है। अमेरिका, यूरोप, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड के लोग इसे पसंद करते हैं।